मेरठ: ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले जो भी किसान खरीफ से संबंधित फसल लगाना चाहते हैं. इसके लिए वह ऐसे बीज की तलाश कर रहे हैं. जिसके माध्यम से फसल काफी बेहतर हो. साथ ही शुरुआत में बीमारी लगने की संभावना रहती हैं, उससे भी छुटकारा मिल जाएं. तो ऐसे सभी किसानों के लिए अच्छी खबर है. वह सभी जिला उद्यान विभाग द्वारा संचालित हाईटेक नर्सरी के माध्यम से पौध लेकर संबंधित खेत में लगा सकते हैं. जिसके माध्यम से काफी बेहतर फसल प्राप्त होगी. इन्हीं बातों को देखते हुए लोकल 18 की टीम द्वारा जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार से खास बातचीत की.जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि वर्तमान समय में आधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग कृषि के क्षेत्र में भी किया जाएं तो उसे किसानों को काफी फायदा होगा. उत्तर प्रदेश शासन के दिशा-निर्देश अनुसार मेरठ जनपद में दो हाईटेक नर्सरी संचालित है. जिसका लाभ लेते हुए किसान अच्छी फसल की तरफ कदम बढ़ा सकते हैं. उन्होंने बताया कि जिस तरह से आप खरीफ की फसल में लौकी, तोरी, खीरा सहित विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियां लगाई जाएगी. इसके लिए किसान हाईटेक नर्सरी के माध्यम से अपनी पसंद के बीज की पौध को प्राप्त कर सकते हैं.
इसी के साथ किसान अगर खुद से भी बीज नर्सरी में उपलब्ध कराएंगे. तो उन्हें 40 दिन के अंतराल बाद पौध उपलब्ध करा दी जाएगी. इसके लिए शासन द्वारा अलग-अलग दर निर्धारित की गई है. उन्होंने बताया कि अगर आप खुद से बीज देंगे तो आपको ₹1 प्रति पौध का चुकाना होगा. वहीं अगर आप नर्सरी से ही पौध खरीदेंगे तो उसके लिए ₹2 प्रति पौध देना होगा.
हाईटेक नर्सरी से बिना मिट्टी के तैयार होंगे पौधेउन्होंने बताया कि हाईटेक नर्सरी के माध्यम से जो पौध उगाई जाती है. इसमें मिट्टी का उपयोग नहीं किया जाता है. साथ ही अब आने वाले समय में मौसम में बदलाव भी देखने को मिलेगा. ऐसे में किसान जब खेतों में बीज डालते हैं, तो उसमें कई बार बीजों का अंकुरण सही से नहीं हो पाता है. जबकि हाईटेक नर्सरी में सभी बीज का अंकुरण काफी बेहतर होता है. इसमें शुरुआती तौर पर जो बीमारी लगने की संभावना ही रहती है. वह बेहद कम हो जाती है. ऐसे में सभी किसान आईटेक नर्सरी का लाभ ले सकते हैं. उन्होंने बताया कि जो भी किसान नर्सरी से बीज खरीदना चाहते हैं. वैसे भी नर्सरी में संपर्क करते हुए लाभ ले सकते हैं. साथ ही अधिक जानकारी के लिए जिला उद्यान विभाग का भी विजिट कर सकते हैं. बताते चले कि बड़ी संख्या में किसान इसी तरीके से हाईटेक नर्सरी से लेकर खेती की तरफ बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं. जिससे उन्हें काफी लाभ हो रहा है.





