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आदिवासियों की सेवा करेगा…बस्तर में जन सुविधा केंद्र के शुभारंभ पर गृह मंत्री अमित शाह

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के बस्तर में शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केंद्र का शुभारंभ किया. उन्होंने कहा कि शहीद वीर गुण्डाधुर की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि बस्तर के नेतानार गांव को तीर्थ माना जाता है और नक्सलवाद की समाप्ति के बाद वहां CSC केंद्र का खुलना ऐतिहासिक है. उन्होंने कहा कि बस्तर की जिस भूमि पर नक्सलियों ने 6 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या की थी, उसी स्थान पर आज गरीब आदिवासियों के लिए जनसेवा केंद्र का निर्माण हो रहा है.शाह ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति का उद्देश्य केवल नक्सलियों को जड़ से उखाड़ फेंकना ही नहीं, बल्कि गरीब आदिवासियों तक जनकल्याणकारी सुविधाएं पहुंचाना भी है. उन्होंने कहा कि देशभर में आजादी 1947 में आ गई थी, मगर बस्तर में 31 मार्च 2026 के बाद आजादी का सूर्योदय हुआ है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति के बाद आदिवासी बहनें विकास का नेतृत्व करेंगी और नक्सलवाद से हुए दशकों के नुकसान की भरपाई हमारी सरकार अगले 5 वर्षों में करेगी.केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि आज एक बहुत ऐतिहासिक दिन है। शहीद वीर गुण्डाधुर की यह जन्मभूमि और कर्मभूमि भारत के हर नागरिक के लिए तीर्थ समान है. वर्ष 1910 में वीर आदिवासी नेता ने भूमकाल विद्रोह के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत की थी और विदेशी शासन के विरुद्ध बस्तर के आदिवासियों की लड़ाई का नेतृत्व किया था. उन्होंने कहा कि आज उन्हीं से प्रेरणा लेकर नेतानार का यह कैंप, जो वर्ष 2013 से सुरक्षा कैंप था, अब सेवा कैंप बनकर आदिवासियों की सेवा करेगा उन्होंने कहा कि यह कैंप हमें याद दिलाएगा कि एक समय यहां छह पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या की गई थी, स्कूल और अस्पताल उजाड़ दिए गए थे, राशन पहुंचने नहीं दिया गया और लोगों को रोजगार व शिक्षा से वंचित रखा गया.आज उसी स्थान को गरीब आदिवासियों की सेवा का एक तीर्थ स्थल बनाया जा रहा है.  अमित शाह ने कहा कि जब नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया गया था, तो उसका उद्देश्य केवल नक्सलियों का खात्मा करना नहीं था, बल्कि इस क्षेत्र के गरीब आदिवासियों तक वे सभी सुविधाएं पहुंचाना था जो बड़े शहरों में उपलब्ध हैं, ताकि उनके बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बन सके.उन्होंने बताया कि “नियद नेल्लानार” योजना के तहत हर गांव में सस्ते राशन की दुकान, प्राथमिक विद्यालय और समूह PSC एवं CSC खोले जा रहे हैं. अब लोगों के घरों तक पीने का पानी पहुंच रहा है, आधार और राशन कार्ड बन रहे हैं और हर व्यक्ति को प्रति माह 7 किलो चावल मिल रहा है, साथ ही 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की योजना भी लागू हो चुकी है. उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने दशकों तक यह भ्रम फैलाया कि विकास नहीं हुआ इसलिए हथियार उठाए गए, जबकि सच्चाई यह है कि इस क्षेत्र का विकास नक्सलियों के कारण नहीं हो सका.उन्होंने कहा कि रायपुर में हुए विकास कार्यों को एक वर्ष के भीतर गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा और सरकार की हर सुविधा पर गांव के लोगों का उतना ही अधिकार है जितना शहरों के लोगों का है. अमित शाह ने कहा कि बस्तर में करीब 200 कैंप हैं और उनमें से 70 कैंप को अगले डेढ़ वर्षों में जनसेवा केंद्र के रूप में परिवर्तित किया जाएगा, जहां बैंकिंग, आधार, राशन कार्ड और सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर मिलेगा. यहां केंद्र और राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया जाएगा.उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया है कि नक्सलवाद समाप्त मानकर चैन से नहीं बैठना है, बल्कि हुए नुकसान की भरपाई 5 वर्षों में कर इन गांवों को ऊर्जावान आदिवासी गांवों में बदलना है. इसके लिए बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों की शुरुआत की गई है ताकि आदिवासी खेल, साहित्य, भाषा, संगीत, कला और संस्कृति को आगे बढ़ाया जा सके.अमित शाह ने कहा कि देश में आजादी 1947 में आई, लेकिन बस्तर में 31 मार्च 2026 के बाद असली आजादी का सूर्योदय हुआ है. उन्होंने कहा कि जो देरी हुई उसकी भरपाई की जाएगी और इस क्षेत्र के विकास में भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेंगी.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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