उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर के टांडा कस्बे से ताल्लुक रखने वाले और सोशल मीडिया पर अपनी एजुकेशनल कॉमेडी से लाखों युवाओं के चहेते बने असहाब अहमद अंसारी ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर सरकारी सेवा में प्रवेश कर लिया है. असहाब का चयन देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक SSC CGL 2025 में हुआ है, जिसके जरिए उन्हें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में ऑफिस सुपरिटेंडेंट की पोस्ट हासिल हुई है. खास बात यह है कि उनकी यह सफलता केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उन लाखों एस्पिरेंट्स के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा है जो सोशल मीडिया को केवल समय की बर्बादी मानते हैं.
असहाब की प्रारंभिक शिक्षा उनके गृह नगर टांडा से ही हुई. उन्होंने यहां के आदर्श जनता इंटर कॉलेज से अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद वे इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (JEE Mains) की कोचिंग के लिए राजस्थान के मशहूर एजुकेशन हब कोटा गए. कोटा में तैयारी के बाद उनका चयन देश के प्रतिष्ठित अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में हुआ, जहां से उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की.
सपना था IAS बनने का
बीटेक पूरा करने के बाद असहाब के मन में देश की सबसे कठिन परीक्षा संघ लोक सेवा आयोग UPSC) पास कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) बनने का सपना था. उनके पिता की साल 2009-10 में सरकारी शिक्षक के रूप में नौकरी लग गई थी, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हो चुकी थी. पिता की नौकरी और बुनकर व्यवसाय (पावर लूम) के बैकअप के कारण वे साल 2017 के आस-पास दिल्ली के मुखर्जी नगर गए और UPSC की कोचिंग शुरू की.
इसी दौरान दोस्तों और शुभचिंतकों की सलाह पर कि उनकी गणित (Maths) और अंग्रेजी (English) अच्छी है, उन्होंने एसएससी सीजीएल (SSC CGL) का एग्जाम देना शुरू किया. उन्होंने 2018 का पेपर दिया, जिसका फाइनल रिजल्ट साल 2021 में आया असहाब बताते हैं, “मुझे पूरी उम्मीद थी कि पहले ही प्रयास में मुझे कम से कम जीएसटी इंस्पेक्टर (GST Inspector) की पोस्ट तो मिल ही जाएगी, क्योंकि प्री और मेन्स सब अच्छे गए थे. लेकिन जब फाइनल लिस्ट आई, तो मेरा चयन महज 0.5 (पॉइंट फाइव) मार्क्स से रुक गया था. वह मेरी जिंदगी का सबसे डिप्रेसिंग फेज था. मैं अंदर से पूरी तरह टूट चुका था और रोना-पीटना मचा हुआ था.”
0.5 नंबर से सिलेक्शन रुकने के बाद जब वे पूरी तरह हताश हो चुके थे, उसी दौरान देश में Covid-19 की दूसरी लहर आई और वे दिल्ली से अपने घर टांडा लौट आए. इसी खाली समय और अवसाद से बाहर निकलने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो बनाना शुरू किया.
मुद्दों को बनाया हथियार
चूंकि उन्होंने खुद बेरोजगारी का एक लंबा और कड़ा दौर देखा था, इसलिए उन्होंने छात्रों और बेरोजगारों के मुद्दों को ही अपने वीडियो का जॉनर बनाया.
लाखों फॉलोअर्स का प्यार
वे यूपीएससी, एसएससी, बैंकिंग, यूपी पीसीएस, यूपीएसएसएससी पेट (UPSSSC PET) और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की विसंगतियों और छात्रों की मनोदशा पर ‘एजुकेशनल कॉमेडी’ और ह्यूमर्स वीडियो बनाने लगे. देखते ही देखते सोशल मीडिया पर उनके लाखों प्रशंसक हो गए. वर्तमान में इंस्टाग्राम पर उनके करीब 4 लाख, यूट्यूब (YouTube) पर 6 लाख से अधिक और फेसबुक पर लगभग 70 हजार फॉलोअर्स हैं.
पढ़ाई और डिजिटल क्रिएशन का बेहतरीन संतुलन
जब असहाब से पूछा गया कि उन्होंने 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स के इस साम्राज्य को संभालते हुए पढ़ाई कैसे मैनेज की, तो उन्होंने युवाओं को एक बेहद सटीक सीख दी. कहा, “सोशल मीडिया को मैंने कभी टाइमपास या रील्स स्क्रॉल करने के नजरिए से नहीं देखा. सोशल मीडिया मेरे लिए एक ‘काम’और प्रोफेशन जैसा था. मैं सोशल मीडिया से सिर्फ उतनी ही देर जुड़ता था जितनी देर मुझे अपना कंटेंट पोस्ट करना होता था या काम होता था. बाकी का पूरा समय मैं सिर्फ और सिर्फ किताबों और गंभीर पढ़ाई को देता था. यही वजह रही कि मैं भटका नहीं.”
अब इनकम भी है और टैक्स भी!
असहाब के सफर में संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ था. इसके बाद भी कई बार कभी एक नंबर से तो कभी नॉर्मलाइजेशन के फेर में उनका अंतिम चयन रुकता रहा. आखिरकार उन्होंने सितंबर 2025 में प्रीलिम्स और जनवरी में मेन्स का एग्जाम दिया.
जब अप्रैल 2026 के शुरुआती हफ्ते में इसका फाइनल रिजल्ट आया, तो कट-ऑफ 312 के आस-पास गई और असहाब के नंबर 311 थे, यानी वे फिर 1 नंबर से चूक गए. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. महज 3-4 दिन पहले जब एसएससी ने CGL 2025 का रिवाइज्ड रिजल्ट जारी किया, तो कट-ऑफ घटकर 311 अंक पर आ गई और असहाब का चयन हो गया.
अपनी इस अनूठी सफलता पर मजाकिया अंदाज में चुटकी लेते हुए असहाब कहते हैं, “पहले जिंदगी में न तो कोई इनकम थी और न ही कोई टैक्स था, लेकिन अब इनकम टैक्स विभाग में होने के बाद ये दोनों चीजें एक साथ आ गई हैं.”
पारिवारिक पृष्ठभूमि और भविष्य का प्लान
असहाब के परिवार में उनके माता-पिता के अलावा एक छोटा भाई है. उनके चाचा जानिसार मास्टर टांडा में एक कोचिंग चलाते हैं, जिनसे असहाब ने शुरुआती दिनों में शिक्षा ली थी. पिता की सरकारी नौकरी से पहले उनका परिवार पारंपरिक रूप से पावर लूम (कपड़े बुनने का काम) चलाता था. असहाब का कहना है कि उन्होंने अपने 8-9 साल के लंबे तैयारी के सफर में यह सीखा है कि बहुत लंबी प्लानिंग करने से कुछ नहीं होता. दिल्ली वे IAS बनने गए थे, वो नहीं हो पाया लेकिन जो मिला वो कभी सोचा नहीं था. फिलहाल वे अपनी नौकरी के साथ-साथ पढ़ाई और वीडियो बनाने के अपने शौक को जारी रखेंगे.



