मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बोत्सवाना से लाए गए दो चीतों को उनका क्वारंटाइन पीरियड पूरा होने के बाद कूनो नेशनल पार्क के एक खुले जंगल में छोड़ दिया. इस मौके पर CM ने कहा कि नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना से लाए गए चीतों को फिर से बसाने का काम लगातार सफल हो रहा है और आज मध्य प्रदेश ने ‘चीता राज्य’ के तौर पर पूरे देश में पहचान बनाई है.
CM यादव ने कूनो नदी के किनारे एक जगह पर पहचान नंबर CCV-2 और CCV-3 वाली मादा चीतों को छोड़ा. इससे ‘प्रोजेक्ट चीता‘ को और गति मिलेगी और भारत के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक और अहम अध्याय जुड़ जाएगा.
प्रोजेक्ट चीता का मकसद राज्य में लुप्तप्राय जानवरों की प्रजातियों को फिर से बसाना, उनकी संख्या बढ़ाना और उन्हें खुले में शिकार करने और घूमने-फिरने के लिए तैयार करना है.परिवार का हिस्सा बना लिया है. चीतों को फिर से बसाने का यह प्रोजेक्ट करीब साढ़े तीन साल पहले कूनो में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया था और यह सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है. मध्य प्रदेश इस अहम प्रोजेक्ट में नए रिकॉर्ड बना रहा है.”बता दें कि फरवरी में बोत्सवाना से कूनो लाए गए 9 चीतों (6 मादा और 3 नर) को छोटे बाड़ों में रखा गया था, ताकि वे वहां के स्थानीय माहौल में ढल सकें. अब उन्होंने अपना क्वारंटाइन पीरियड पूरा कर लिया है.
चीतों के आने से, भारत में चीतों की कुल संख्या (जिनमें देश में ही पैदा हुए शावक भी शामिल हैं) बढ़कर 57 हो गई है. यह ‘प्रोजेक्ट चीता’ का तीसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय चरण है.
इससे पहले, 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ चीते भारत लाए गए थे, जबकि 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो पहुंचे थे.





