राज्य सरकार अब प्रदेश में पैदा होने वाले अंगूर और जामुन के अलावा अन्य फलों से वाइन बनाने की अनुमति देगी। इसके लिए बाकायदा नए लाइसेंस जारी किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इसके माध्यम से अंगूर, जामुन और अन्य फल उत्पादित करने वाले किसानों की आमदनी बढ़ेगी। इनसे बनने वाली वाइन को आबकारी शुल्क से मुक्त रखा जाएगा। यह व्यवस्था एक अप्रैल से 31 मार्च 2027 तक की अवधि के लिए लागू की गई आबकारी नीति में की गई है।
आबकारी विभाग द्वारा इसी साल एक अप्रैल से लागू होने वाली नई आबकारी नीति के लिए किए गए नोटिफिकेशन में कहा गया है कि राज्य शासन द्वारा घोषित अंगूर प्रसंस्करण नीति के अन्तर्गत प्रदेश में फलोद्यान विस्तार एवं फ्रूट प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने एवं किसानों की आय में वृद्धि के लिए निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत प्रदेश में उत्पादित अंगूर एवं जामुन के अतिरिक्त अन्य फलों तथा प्रदेश में उत्पादित एवं संग्रहीत शहद (हनी) से निर्मित वाइन के निर्माण की अनुमति रहेगी। इसके लिए नए वाइनरी लायसेंस जारी किए जायेंगे।
नीति में यह भी कहा गया है कि मध्यप्रदेश में उत्पादित अंगूर से मध्यप्रदेश में निर्मित वाइन को आबकारी शुल्क से वित्तीय वर्ष 2027-28 तक के लिए मुक्त रखा गया है। यह छूट अन्य फलों तथा शहद (हनी) से निर्मित वाइन पर भी लागू होगी।
सभी बार लायसेंसी को 2 पेटी हेरिटेज शराब स्टॉक और बिक्री करना होगी
आबकारी नीति में कहा गया है कि सभी बार लायसेंसों को हेरिटेज मदिरा की न्यूनतम मात्रा 2 पेटी विक्रय के लिए अनिवार्य रूप से स्टॉक करेगा। यह स्टॉक निर्धारित न्यूनतम मात्रा से कम होना पाए जाने पर कलेक्टर ऐसी कम मात्रा पर अधिकतम रूपए 250 रुपए प्रति प्रूफ लीटर शास्ति अधिरोपित कर सकेंगे। रेस्टोरेन्ट, पर्यटन, होटल, रिसोर्ट तथा क्लब बार लायसेंस के अन्तर्गत परिसर में विदेशी शराब की बिक्री का समय प्रातः 10 बजे से रात्रि 11:30 बजे तक रहेगा। यहां शराब पीने का समय रात्रि 12 बजे तक रहेगा।
वाइन टेस्टिंग सुविधा भी मिलेगी
नीति में कहा गया है कि प्रदेश में उत्पादित फलों, शहद से प्रदेश में वाइन निर्माण करने वाली इकाइयों को उनके परिसर में वाइन के फुटकर विक्रय के लिए एक रिटेल आउटलेट स्वीकृत किया जा सकेगा। आगंतुकों, पर्यटकों के लिए वाइनरी परिसर में वाइन टेवर्न (वाइन टेस्टिंग सुविधा) की अनुमति होगी। वाइन शॉप पर प्रदेश के उत्पादों से प्रदेश में ही निर्मित वाइन एवं हेरिटेज मदिरा तथा अन्य राज्यों में निर्मित हेरिटेज शराब जिसे मध्यप्रदेश शासन मान्य करेगा, उसकी ही बिक्री की जा सकेगी। इसी प्रकार एयरपोर्ट काउंटर पर भी हेरिटेज मदिरा, प्रदेश के उत्पादों से प्रदेश में ही निर्मित वाइन के बिक्री की अनुमति होगी।
300 मीटर की रेंज में कोई दूसरी दुकान है तो हटेगी
नई आबकारी नीति में कहा गया है कि वर्ष 2026-27 में कोई नई शराब दुकान नहीं खोली जायेगी। प्रदेश की किसी भी शराब दुकान के परिसर में मदिरा सेवन की अनुमति नहीं होगी। पॉलिसी में कहा गया है कि वर्तमान में कई जिलों में समान या भिन्न समूहों की अनेक शराब दुकानें बहुत आस-पास संचालित हैं। वर्ष 2026-27 में 300 मीटर की रेंज में संचालित शराब दुकानों को टेंडर प्रक्रिया से पूर्व समान निकाय में विस्थापित करना होगा। इसके लिए जिला स्तरीय समिति अधिकृत होगी।
विस्थापित शराब दुकान उस दुकान के लिए घोषित परिक्षेत्र में स्थापित की जायेगी या विस्थापित की जाने वाली शराब दुकान के वर्तमान घोषित परिक्षेत्र में युक्तियुक्त स्थल के अभाव में आवश्यकतानुसार परिक्षेत्र के बाहर भी इस प्रकार विस्थापित की जा सकेंगी बशर्ते कि वह उस क्षेत्र में पूर्व से स्थापित शराब दुकान के पोटेंशियल एरिया को गंभीर रूप से प्रभावित न करे। किसी भी स्थिति में उस क्षेत्र में पूर्व स्थापित शराब दुकान के 300 मीटर की परिधि में न हो। जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा के आधार पर आबकारी आयुक्त शराब दुकान को समान स्थान पर संचालन करने की अनुमति दे सकेंगे। विस्थापित दुकान को किसी भी स्थिति में पूर्व स्थान पर फिर से संचालित करने की अनुमति नहीं होगी।
जिले में कहीं और दुकान खोलने के लिए आबकारी आयुक्त की अनुमति जरूरी
विस्थापित की जाने वाली दुकानों को छोड़कर किसी अन्य शराब दुकान को विस्थापित कर जिले में अन्य स्थान पर खोलने का निर्णय जिला समिति द्वारा आबकारी आयुक्त की पूर्व अनुमति के अधीन ही लिया जा सकेगा। राजस्व हित में जिले में अन्य स्थान पर विस्थापित की गई शराब दुकान या अपरिहार्य कारणों से बन्द की गई शराब दुकान की सम्बद्धता (Correlation) का निर्धारण, विस्थापित दुकान के पूर्व स्थल की निकटवर्ती दुकानों से समानुपातिक आधार पर किया जाएगा।
शराब दुकानों के समूह का गठन-पुनर्गठन ऐसे होगा
- राज्य की सभी शराब दुकानों के टेंडर के लिए भौगोलिक स्थिति एवं राजस्व हित के आधार पर अधिकतम 5 शराब दुकानों तक का ही समूह गठित किया जायेगा।
- शराब की दुकानों के समूह के गठन पुनर्गठन विघटन करने के संबंध में जिला समिति आबकारी आयुक्त की अनिवार्य अनुमति के अधीन निर्णय ले सकेगी।
- किसी जिले में गठित सभी समूहों हेतु ई-टेण्डर (ई-टेण्डर एवं ईटेण्डर-कम-ऑक्शन) की प्रथम चरण की कार्यवाही होने के बाद टेंडर क्लियर न होने की स्थिति में राजस्व हित में समूहों का पुनर्गठन किया जा सकेगा।
- जिले का वर्ष 2026- 27 का आरक्षित मूल्य 200 करोड़ से अधिक होने की स्थिति में किसी भी समूह का आरक्षित मूल्य जिले के आरक्षित मूल्य से 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होने के प्रतिबंध के साथ समूहों का पुनर्गठन किया जा सकेगा।
- राजस्व के आधार पर ऐसे नवगठित समूहों में मदिरा दुकानों की संख्या का कोई बंधन नहीं होगा। इस पुनर्गठन के लिए समूहों में शामिल दुकानों की भौगोलिक निरंतरता की अनिवार्यता नहीं रहेगी।
- ऐसा पुनर्गठन जिला समिति द्वारा युक्तियुक्त प्रस्ताव के आधार पर आबकारी आयुक्त की अनुमति से लिया जा सकेगा।
तीन नए जिलों के लिए भी नई व्यवस्था
नीति में कहा गया है कि रीवा, सतना एवं छिन्दवाड़ा जिलों को विभाजित कर मऊगंज, मैहर एवं पांढुर्ना जिले गठित किए गए हैं। इन जिलों में वर्तमान में प्रचलित किसी मदिरा समूह में शामिल दुकानें यदि एक से अधिक जिले की राजस्व सीमा में आती हो, तो उन समूहों का नवगठित जिलों की राजस्व सीमाओं के निर्धारण के अनुरूप पुनर्गठन किया जायेगा। शराब समूह में सम्मिलित दुकानें एक से अधिक जिले की राजस्व सीमाओं के अंतर्गत नहीं आनी चाहिए।
ई टेंडरिंग में समूह का चयन रैंडम आधार पर
ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया के दौरान जिलों की मदिरा दुकानों एवं समूहों का उनके पूर्व वर्षों के डेटा से विभिन्न मापदंडों के आधार पर वर्गीकरण किया जाएगा एवं प्रत्येक जिले के ऐसे वर्गीकृत समूहों का बैच बनाकर विभिन्न चरणों में निष्पादन किया जायेगा। जिले का कोई समूह, किस चरण में निष्पादन की प्रक्रिया में सम्मिलित होगा, यह पूर्व निश्चित नहीं होगा। ई-टेण्डर की प्रक्रिया के दौरान किसी चरण में सम्मिलित होने वाले समूहों का चयन रैंडम आधार पर सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जाएगा।





