नरवाई जलाने के मामले में मध्यप्रदेश देश में सबसे आगे है। नरवाई जलाने वाले 5 राज्यों में 60% से ज्यादा हिस्सेदारी मप्र से ही है। 5 राज्यों में अप्रैल में गेहूं की नरवाई जलाने के 48,524 मामले दर्ज हुए। इनमें 32,211 मामले अकेले मप्र में दर्ज हुए। हालात इतने खराब हैं कि पूरे देश में नरवाई की घटनाओं वाले टॉप 10 जिलों में से 8 मप्र के हैं। इनमें भी विदिशा तो सबसे ऊपर है
ये आंकड़े कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोईकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस (सीआरईएएमएस) और इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) के हैं। इनके मुताबिक नरवाई जलाने के मामले में मप्र के बाद दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है। जहां अप्रैल में 13,308 घटनाएं दर्ज हुई हैं। हरियाणा (1565) तीसरे, पंजाब (1418) चाैथे और दिल्ली (22) पांचवें स्थान पर है।
मप्र में 14 अप्रैल तक नर्मदापुरम जिला टॉप पर था, लेकिन पिछले 15 दिन में विदिशा-रायसेन के इलाकों में नरवाई जलाने के मामले इतने बढ़े कि ये दोनों जिले टाॅप पर आ गए। ऐसा संभवत: देरी से बुआई और कटाई के कारण हुआ। नरवाई जलाने वाले किसानों पर 15 हजार तक जुर्माने और एफआईआर का प्रावधान है, लेकिन यह प्रभावी नहीं हो पा रहा है।
बायोमॉस प्लान फेल..
नरवाई से बिजली बनाने में 1.27 लाख टन बायोमॉस का ही उपयोग
पर्यावरण विभाग ने खतरा भांपते हुए प्रदेश के सभी 15 सरकारी व 17 निजी ताप विद्युतगृहों के साथ मिलकर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के निर्देश हैं कि वर्ष 2024-25 में कुल कोयला खपत का 5% और 2025-26 में 7% हिस्सा बायोमॉस के साथ जलाया जाना चाहिए था।
इसके हिसाब से 46 से 58 लाख टन बायोमॉस का उपयोग होना था। लेकिन अब तक 2 लाख मीट्रिक टन बायोमॉस ही उपयोग में लिया गया है। अब बायोमॉस उत्पादन बढ़ाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। अभी हरियाणा-उप्र से बायोमॉस मंगाया जा रहा है।
नरवाई को जलाएं नहीं, यूरिया और डीकंपोजर से गलाएं, खाद बनाएं
नरवाई से भूसा बनाना सबसे उत्तम विकल्प है। बेलर मशीन से नरवाई के बंडल बनाकर कांच जैसे नाजुक सामान की पैकेजिंग में किया जा सकता है। सुपर फीडर और सीड ड्रिल जैसी मशीनों के माध्यम से ‘जीरो टिलेज’ (जीरो टिल) तकनीक से बिना जुताई के सीधे मूंग, उड़द और सोयाबीन जैसी फसलें बोई जा सकती हैं। यूरिया और डीकंपोजर के छिड़काव से नरवाई को खाद में बदला जा सकता है, मिट्टी को प्राकृतिक पोषक तत्व भी मिलते हैं।
विदिशा… पिछले साल से 12.63% कमी का दावा
डिप्टी डायरेक्टर (कृषि) केएस खपेड़िया का कहना है कि विदिशा जिले में नरवाई जलाने की घटनाओं में प्रशासन और किसानों के संयुक्त प्रयासों से उल्लेखीय कमी आई है। वर्ष 2025-26 में जहां 4417 घटनाएं सामने आई थीं, वहीं वर्तमान वर्ष में यह संख्या घटकर 3906 रह गई, यानी करीब 12.63% की कमी हुई है।





