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प्लास्टिक-मशीनरी पार्ट्स इंडस्ट्री में भूचाल, कच्चे माल की कीमतें आसमान पर, रोजगार पर संकट

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब हजारों किलोमीटर दूर बीकानेर के स्थानीय उद्योगों पर भी साफ दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और आयात-निर्यात में अनिश्चितता के चलते रानीबाजार औद्योगिक क्षेत्र में स्थित प्लास्टिक पाउच पैकिंग और मशीनरी पार्ट्स उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। अप्रत्याशित तेजी और सप्लाई चेन में आई रुकावट से दोनों उद्योग बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं, जिससे श्रमिकों के पलायन का संकट पैदा हो गया है।

रानीबाजार औद्योगिक क्षेत्र के व्यवसायी विमल चोरड़िया के अनुसार इस अप्रत्याशित और अस्थाई तेजी के कारण पैकिंग पाउच की कमी हो गई है, जिससे हर उत्पाद की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। पापड़-भुजिया उद्योग में पैकिंग पाउच बड़ी मात्रा में उपयोग होता है। ज्यादा दिन युद्ध चला तो इसका प्रॉडक्शन पूरी तरह ठप हो जाएगा। क्योंकि कंपनियों ने दाना महंगा कर दिया है। रानीबाजार औद्योगिक क्षेत्र स्थित आयरन उद्योग से जुड़े कमल राठी ने बताया कि युद्ध का प्रतिकूल असर सीआई कास्टिंग से निर्मित मशीनरी पार्ट्स बनाने वाले उद्योग पर भी पड़ रहा है।

प्लास्टिक पाउच पैकिंग रॉ मेटेरियल में 62% तक की भारी तेजी

पाउच पैकिंग में उपयोग होने वाले केमिकल में 35% और अन्य केमिकलों में 60% तक का उछाल दर्ज किया गया है।

} पैकिंग पाउच इंडस्ट्री के मुख्य घटक क्रूड ऑयल से जुड़े होने के कारण, इंडस्ट्री द्वारा रॉ मेटेरियल की मांग का केवल 30% सप्लाई ही मिल पा रही है।

मशीनरी पार्ट्स इंडस्ट्री भी मुश्किल में

रोजगार पर दोहरी मार

उद्योगों में आई इस मंदी के कारण श्रमिकों के रोजगार पर भी गहरा असर पड़ने लगा है। गैस की अनुपलब्धता से उत्पादन प्रभावित है और अस्थिरताओं के कारण इंडस्ट्रियों के बंद होने की आशंका से श्रमिक वर्ग अब यहां से पलायन करने की सोचने लगा है। इसका असर बीकानेर की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट

} बड़ी कंपनियों की मोनोपोली : बड़ी कंपनियों ने मोनोपोली चलाते हुए पिग आयरन की कीमत 41 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 44 रुपये प्रति किलो कर दी है, जिससे सीआई मशीनरी पार्ट्स की कीमतें बढ़ गई हैं।

} घटकों में तेजी : कास्टिंग निर्माण में काम आने वाले केमिकल में 20% से अधिक की तेजी आई है।

} महंगे आयातित टूल बीट : लेथ मशीन में माल टर्न करने के लिए प्रयोग होने वाले टूल बीट, जो भारत के बाहर से आयात होते हैं, उनकी कीमत 4,000 रुपये प्रति डिब्बा से बढ़कर चौंकाने वाली 17,000 रुपये प्रति डिब्बा हो गई है।

} अन्य संकट : लोहे के स्क्रैप की कीमतों में 2 से 3 रुपए की तेजी, मोरबी (गुजरात) से आने वाली भट्टी की चिनाई की ईंट की कीमत 17-18 रुपये से बढ़कर 20 रुपये नग हो गई है। पेट्रोल-डीजल की अनुपलब्धता या ब्लैक के कारण ज्यादा भाड़ा देकर माल मंगवाना पड़ रहा है।


 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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