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कोलकाता में बनने वाले थे टीचर, पर बन गए स्टील-किंग; आज दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी के मालिक

हम आपको दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी के बनने की कहानी बता रहे हैं। जिसे किसी और ने नहीं बल्कि भारत के ‘स्टील किंग’ कहे जाने वाले आर्सेलर मित्तल (ArcelorMittal) के चेयरमैन लक्ष्मी निवास मित्तल हैं। एक समय था जब उन्हें अकाउंटेंसी पढ़ाने का ऑफर मिला था, लेकिन आज वह $61.3 बिलियन (लगभग 5.70 लाख करोड़ रुपये) के रेवेन्यू वाले साम्राज्य (ArcelorMittal Owner) के मालिक हैं। कंपनी का मार्केट कैप 3.80 लाख करोड़ रुपये है। आइए दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी के बनने की   जानते हैं।

शिक्षक बनने का प्रस्ताव ठुकरा कैसे शुरू किया व्यापारिक सफर?

अगर लक्ष्मी मित्तल को सुबह जल्दी उठने से नफरत न होती, तो शायद वह दुनिया के सबसे बड़े स्टील मैग्नेट के बजाय एक अकाउंटेंसी शिक्षक होते। 1969 में जब उन्होंने कलकत्ता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से अपनी डिग्री ली, तो उन्होंने अकाउंटेंसी और कमर्शियल गणित में कॉलेज के इतिहास में सबसे अधिक अंक प्राप्त किए थे।
इस उपलब्धि पर कॉलेज के प्रिंसिपल ने उनसे कहा था कि “मित्तल, आप कल से अकाउंटेंसी पढ़ाना शुरू करें। आपको प्रथम वर्ष के छात्रों के साथ सुबह 6 बजे कक्षा शुरू करनी होगी।इस पर मित्तल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “सुबह छह बजे? मैं ऐसा दोबारा नहीं करूंगा। एक छात्र के रूप में अपने तीन वर्षों में मैंने यह बहुत किया है।” इसके बाद, मित्तल ने पढ़ाने के बजाय आंध्र प्रदेश में अपने परिवार के छोटे से स्टील व्यवसाय ‘इस्पात’ को जॉइन कर लिया और यहीं से उनके स्टील किंग बनने की नींव पड़ी।

कैसे हुआ दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी का निर्माण?

मित्तल की असली उड़ान 1975 में 26 वर्ष की आयु में शुरू हुई। जब उनका परिवार इंडोनेशिया में स्टील मिल लगाने में संघर्ष कर रहा था, तब मित्तल ने वहां जाकर जापानी स्टील कंपनियों को टक्कर देने के लिए एक ‘मिनी-मिल’ स्थापित की।

1994 में, मित्तल ने अपने व्यवसाय को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए पारिवारिक व्यवसाय से खुद को अलग कर लिया। मित्तल की रणनीति थी घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों को खरीदना। उन्होंने त्रिनिदाद और टोबैगो, मैक्सिको, रोमानिया, पोलैंड और कजाकिस्तान में दिवालिया हो रही मिलों को खरीदा और उन्हें मुनाफे में बदल दिया।

कजाकिस्तान की खस्ताहाल खदानों में उन्होंने सोवियत काल के कामकाज के तरीकों को बदला, कर्मचारियों को नकद वेतन दिया और एक ही साल में उत्पादन दोगुना कर दिया।

आर्सेलर के अधिग्रहण की ऐतिहासिक लड़ाई कैसे जीती?

साल 2006 में लक्ष्मी मित्तल ने अपना सबसे बड़ा दांव खेला। उन्होंने यूरोप की दिग्गज स्टील कंपनी आर्सेलर (Arcelor) के अधिग्रहण के लिए €18 बिलियन की शत्रुतापूर्ण (hostile) बोली लगाई। आर्सेलर के तत्कालीन प्रमुख गॉय डोले ने इसका कड़ा विरोध किया और मित्तल की कंपनी का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि उनके उच्च गुणवत्ता वाले स्टील रूपी ‘परफ्यूम’ के सामने मित्तल का स्टील सस्ते ‘ऑड कोलोन’ (Eau de Cologne) जैसा है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि वे “बंदरों के पैसे (Monkey Money) देने वाली भारतीयों की कंपनी” को अपनी फर्म नहीं बेचेंगे। लेकिन मित्तल ने इस चुनौती का कूटनीतिक और रणनीतिक तरीके हल कर दिया।

कैसे मित्तल ने इतिहास का सबसे बड़ा स्टील विलया किया?

  • फ्रांसीसी अरबपति फ्रांस्वा पिनो को अपने बोर्ड में शामिल किया।
  • उन्होंने अपनी बोली को बढ़ाकर €25 बिलियन कर दिया।
  • अखिरकार आर्सेलर के शेयरधारकों ने मित्तल का समर्थन किया।
  • यह इतिहास का सबसे बड़ा स्टील विलय बन गया।

लक्ष्मी मित्तल की कितनी है नेटवर्थ

आज लक्ष्मी मित्तल 60 देशों में कारोबार करते हैं। उनकी उम्र 75 साल है। उनकी नागरिकता भारतीय है लेकिन वह स्विट्जरलैंड में रहते हैं। इसके पहले वह लंबे समय तक लंदन में भी रहे।   के मुताबिक लक्ष्मी मित्तल की नेटवर्थ (Lakshmi Mittal net worth in rupees) 26.2 बिलियन डॉलर (करीब 2,43,479 करोड़ रुपये) है। दुनिया के 70वें सबसे अमीर अरबपति हैं और 12वें भारत के सबसे अमीर शख्स हैं। उन्हें पद्म विभूषण (भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) से सम्मानित किया जा चुका है।

भविष्य की कमान किसके हाथों में?

लक्ष्मी मित्तल मारवाड़ी परंपराओं और पारिवारिक मूल्यों में गहरा विश्वास रखते हैं। जब 2006 में आर्सेलर का अधिग्रहण हुआ था, तब उनके बेटे आदित्य मित्तल (Lakshmi Mittal Children) उनके मुख्य रणनीतिकारों में से एक थे। अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए आदित्य ने कंपनी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई है। 2021 में, लक्ष्मी मित्तल ने आधिकारिक तौर पर कंपनी के सीईओ (CEO) का पद अपने बेटे आदित्य मित्तल को सौंप दिया, जबकि वे स्वयं आर्सेलरमित्तल के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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