राजस्थान के विलय में सिरोही का भी रोचक इतिहास रहा है। राजस्थान का विलय साल 1949 को शुरू हुआ।
इसमें सिरोही को राजस्थान में तो विलय कर दिया, लेकिन सिरोही से आबू-देलवाड़ा को हटा गुजरात में शामिल कर दिया। जिसे फिर से सिरोही में शामिल होने में 6 साल का समय लगा। इतिहासविद डॉ. उदयसिंह देवड़ा ने बताया कि राजस्थान के एकीकरण के दौरान गुजराती नेता सरदार वल्लभभाई पटेल ने सिरोही को गुजरात में मिलाना तय किया।
5 जनवरी 1949 को सिरोही स्टेट के भारत संघ में विलय पत्र पर हस्ताक्षर के बाद सिरोही के विलय का प्रकरण सुलझा नहीं था और उस दौरान सिरोही को राजस्थान में मिलाने को लेकर जन आंदोलन हुए।
आंदोलन देखते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल ने कूटनीति पूर्वक सिरोही को विभाजित कर दिया और उसके 89 गांवों के साथ आबू-देलवाड़ा समेत 304 वर्गमील का क्षेत्र गुजरात में मिला दिया और शेष सिरोही को राजस्थान में सिरोही के आबू देलवाड़ा समेत 89 गांवों को गुजरात में विलय के विरोध में फिर जन आंदोलन हुए। यह देख आक्रोश के मध्य नजर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने मामला राज्य पुनर्गठन आयोग को सौंप दिया।
राज्य पुनर्गठन आयोग ने सिरोही के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, परंपरागत दृष्टि से अध्ययन कर सिरोही के गुजरात में मिलाए गए क्षेत्र को पुन राजस्थान में मिलाए जाने की सिफारिश की। इस आधार पर 1 नवंबर 1956 को सिरोही के आबू-देलवाड़ा समेत 89 गांवों को गुजरात से पुनः सिरोही राजस्थान में विलय किए गए। इसी दिन अजमेर मेरवाड़ा का भी क्षेत्र राजस्थान में मिलाने से राजस्थान के एकीकरण का अंतिम चरण 1 नवंबर 1956 को पूरा हुआ था। यह भी उल्लेखनीय कि इसी दिन राजप्रमुख का पद समाप्त कर राजस्थान के प्रमुख राज्यपाल गुरमुखसिंह निहाल भी 1 नवंबर 1956 को ही बने थे। इस प्रकार राजतंत्र से लोकतंत्र की राजस्थान के एकीकरण की यात्रा पूरी हुई थी। 1 नवंबर 1956 में आबू-देलवाड़ा मिले सिरोही में





