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खतरे में इजरायल, ईरानी हमलों के बीच एयर डिफेंस सिस्टम की भारी कमी, क्या कारगिल का कर्ज उतारेगा भारत?

ईरान पर सफल सैन्य हमले का दावा करने वाला इजरायल मुश्किल में फंस गया है। दरअसल, एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल अपनी लंबी दूरी की मिसाइल इंटरसेप्टर की आपूर्ति को तेजी से कम कर रहा है। इससे इजरायल के एयर डिफेंस को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। इसका प्रमुख कारण यह भी है कि इजरायल को हाल के कुछ दिनों में ईरान के कई हवाई हमलों का सामना करना पड़ा है। इन हमलों में इजरायल में जानमाल का भारी नुकसान भी हुआ है। ऐसे में एयर डिफेंस सिस्टमों की कमी से इजरायल की सुरक्षा की चिंता और ज्यादा बढ़ गई है, क्योंकि वह एक साथ कई मोर्चों पर दुश्मनों से उलझा हुआ है। इस बीच सवाल उठ रहा है कि क्या भारत  का कर्ज उतारेगा।

कारगिल में इजरायल ने कैसे की थी भारत की मदद

कारगिल युद्ध के दौरान इजरायल ने भारत को मोर्टार और गोला-बारूद देकर सहायता की थी। इजरायल उन चुनिंदा देशों में से एक था जिसने कारगिल युद्ध के दौरान भारत की प्रत्यक्ष रूप से मदद की थी। इस युद्ध के दौरान उसने भारतीय वायुसेना के मिराज 2000 लड़ाकू विमानों के लिए लेजर गाइडेड मिसाइलें प्रदान की थी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबावों के बावजूद इजरायल ने कारगिल में पाकिस्तान के घुसपैठ के पहले ऑर्डर दिए गए हथियारों की शिपमेंट को जल्द से जल्द भारत को सौंपा था। इसमें इजरायल के हेरोन अनमैंड एरियल वीकल (यूएवी) की डिलीवरी भी शामिल थी।

खतरे में इजरायल की हवाई सुरक्षा

इजरायल को एयर डिफेंस सिस्टमों की कमी वाली रिपोर्ट अमेरिकी मीडिया वॉल स्ट्रीट जर्नल ने प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी का हवाला देते हुए इजरायल की हवाई सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह रिपोर्ट तब आई है, जब इजरायल और ईरान लगातार एक दूसरे पर मिसाइलों से हमले कर रहे हैं। पिछले शुक्रवार को इजरायल ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन राइजिंग लॉयन शुरू किया था। इसके बाद से ईरानी सेना ने लगभग 400 बैलिस्टिक मिसाइलें इजरायल पर दागी हैं। ये मिसाइलें इजरायल तक पहुंचने में सक्षम 2000 के अनुमानित ईरानी शस्त्रागार का हिस्सा हैं।

ईरान के पास अब भी 1000 से अधिक मिसाइलें

वॉल स्ट्रीट जर्नल को इजरायली अधिकारियों ने बताया है कि उनके हमलों में ईरान के एक-तिहाई मिसाइल लांचर नष्ट हो गए हैं और दावा किया है कि उन्होंने ईरानी आसमान पर हवाई श्रेष्ठता हासिल कर ली है। फिर भी, खुफिया सूत्रों ने चेतावनी दी कि ईरान की मिसाइल सूची का आधा से ज़्यादा हिस्सा बरकरार है, जिसका एक हिस्सा संभवतः अंडरग्राउंड सुरंगों में छिपा हुआ है।

इजरायली इंटरसेप्टरों की कीमतों ने बढ़ाई परेशानी

इजरायल के मल्टीलेयर एयर डिफेंस में आयरन डोम, डेविड स्लिंग, एरो सिस्टम और अमेरिका द्वारा आपूर्ति की गई पैट्रियट्स और THAAD बैटरियां शामिल हैं। हालांकि, इनको लगातार इंटरसेप्शन के योग्य बनाए रखने की लागत गंभीर चिंता का विषय बन रही है। इजरायली फाइनेंशियल डेली द मार्कर ने अनुमान लगाया कि रात के मिसाइल रक्षा संचालन की लागत 1 बिलियन शेकेल ($285 मिलियन) तक है। एरो सिस्टम अकेले ही 3 मिलियन डॉलर की कीमत वाले इंटरसेप्टर फायर करता है।

इजरायल के पास 10 से 12 दिन का स्टॉक

ईरान लगभग रोज ही इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले कर रहा है। इस कारण इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम गंभीर दबाव में हैं। इस बीच वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी और इजरायली खुफिया जानकारी से अवगत एक सूत्र के हवाले से बताया है कि अमेरिका से तेजी से आपूर्ति या सीधे हस्तक्षेप के बिना इदरायल 10 या 12 दिनों तक ही अपने एयर डिफेंस सिस्टमों का यह स्तर मेंटेन कर पाएगा। सूत्र ने कहा कि एयर डिफेंस सिस्टमों पर पहले से ही भारी दबाव है। ऐसे में जल्द ही उन्हें यह चुनना पड़ सकता है, किन मिसाइलों को रोकना है और किन्हें नहीं।भारत की आधिकारिक नीति किसी भी दो देशों के बीच संघर्ष में तटस्थ रहने की है। ऐसे संघर्षों में भारत परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से संघर्ष में शामिल नहीं होता है। इजरायल-ईरान संघर्ष भी कुछ ऐसा ही है, जिसमें भारत कभी भी उलझना नहीं चाहेगा। इस संघर्ष की शुरुआत के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने पहले ही बयान में स्पष्ट कर दिया था कि दोनों ही देश उसके मित्र हैं और उनके साथ मजबूत संबंध हैं। ऐसे में भारत किसी भी तरह से इस संघर्ष में खुद को फंसाना नहीं चाहेगा, खासकर वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए। अगर भारत किसी भी तरह से इजरायल की मदद करता है तो इससे न सिर्फ ईरान के साथ संबंध खराब होंगे, बल्कि खाड़ी देशों के साथ भी द्विपक्षीय रिश्ते बिगड़ेंगे।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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