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नेपाल में RSP की आंधी में उड़े प्रचंड-ओली, बालेन शाह संभालेंगे गद्दी, भारत को लेकर क्या है उनकी सोच

रैपर से नेता बने बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) नेपाल में सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है. पीर्टी ने नेपाल के आम चुनाव में भारी बहुमत से जीत हासिल की है, जिससे राजनीतिक रूप से अस्थिर देश में स्थापित पुरानी पार्टियों का सफाया हो गया है. नेपाल के चुनाव आयोग के अनुसार, RSP ने उन 165 सीट में से 119 सीट पर पहले ही जीत हासिल कर ली है जिनके लिए प्रत्यक्ष मतदान प्रक्रिया के तहत निर्वाचन किया जाता है. वहीं प्रतिनिधि सभा के चुनाव में पार्टी आठ अन्य सीट पर आगे है

बालेन शाह को लेकर राजनीति गरमाई

बालेन शाह की इस जीत के बाद उनकी नागरिकता और कलाकार, रैपर से लेकर राजनीतिक छवि को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बालेन शाह के उपनाम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई. दरअसल, बालेन शाह की नागरिकता को लेकर पहले भी मामला गरमाया है. 2006 तक उनके मूल नागरिकता प्रमाण पत्र (2006) में सरनेम ‘साह’ दर्ज था, जिसे बाद में बदलकर ‘शाह’ कर दिया गया. इसके बाद गृह मंत्रालय में बालेन शाह के खिलाफ आरोप लगाया गया कि उन्होंने कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना अपना सरनेम बदला, जो नागरिकता अधिनियम, 2063 की धारा 12 और 17(2) के तहत एक अपराध हो सकता है.

बालेन शाह की इस जीत के साथ नेपाल की परंपरागत राजनीति के अंत को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं. बालेन शाह एक रैपर थे और फिर उन्होंने राजनीति में एंट्री ली. उनके समर्थक उनकी स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग की डिग्री और काठमांडू के मेयर के रूप में उनके ‘डेटा-संचालित’ काम करने के तरीके को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताते हैं. परंपरागत राजनीतिक रास्ते को छोड़कर उन्होंने लोगों के साथ जुड़ने के लिए सोशल मीडिया का रास्ता अपनाया. 

GEN-G के नेता कहे जाने वाले बालेन शाह ने लोगों के साथ फेसबुक समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए जुड़ना शुरू किया. हालांकि उनके आलोचक उन्हें अहंकारी बताते हैं. मेयर रहते हुए अवैध अतिक्रमण हटाने और रेहड़ी-पटरी वालों के खिलाफ उनकी सख्त कार्रवाई की मानवाधिकार समूहों द्वारा आलोचना की गई है. 

पड़ोसी देशों के साथ तालमेल बैठाना होगा चैलेंज

चुनाव में उनकी जीत के बाद यह भी चर्चा तेज हो रही है कि एक कलाकार, जिसके पास पारंपरिक कूटनीतिक अनुभव की कमी है, कैसे भारत और चीन जैसे शक्तिशाली पड़ोसियों के साथ नेपाल के संबंधों को संभालेंगे. उनके पुराने सोशल मीडिया पोस्ट्स, जिनमें उन्होंने विदेशी शक्तियों की आलोचना की थी, अब चर्चा का विषय बने हुए हैं.

भारत इस चुनाव पर करीब से नजर रख रहा है. वह राजनीतिक रूप से अस्थिर हिमालयी देश में एक स्थिर सरकार की उम्मीद कर रहा है ताकि दोनों पक्षों के बीच विकासात्मक साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सके. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को नेपाल की जनता और सरकार को चुनाव के सफल आयोजन के लिए बधाई दी. पीएम मोदी ने यह भी कहा कि एक घनिष्ठ मित्र और पड़ोसी के रूप में भारत, नेपाल के लोगों तथा उसकी नयी सरकार के साथ मिलकर शांति, प्रगति और समृद्धि की नयी ऊंचाइयों को छूने के लिए दृढ़ संकल्पित है. 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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