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कमीशनखोरी मामले में निलंबित IAS अभिषेक प्रकाश को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, वादी ने कहा गलतफहमी में दर्ज हुई FIR

कमीशनखोरी के आरोपों में फंसे निलंबित आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बड़ी राहत मिली है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट को खारिज कर दिया है. चार्जशीट रद्द होने के बाद अब अभिषेक प्रकाश की बहाली का रास्ता साफ माना जा रहा है और पूरा मामला खत्म होने की संभावना है.

यह मामला उस समय का है जब अभिषेक प्रकाश इन्वेस्ट यूपी के सीईओ थे. उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने एक प्रोजेक्ट के बदले पांच फीसदी कमीशन मांगा था. इस मामले में निकांत जैन का नाम सामने आया था, जिसे अभिषेक प्रकाश का करीबी बताया गया था.

गोमती नगर थाने में सोलर कंपनी के अधिकारी विश्वजीत दास ने एफआईआर दर्ज करवाई थी.  एफआईआर दर्ज होने के बाद यूपी एसटीएफ ने निकांत जैन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था.

वादी ने कहा, गलतफहमी में दर्ज कराई थी एफआईआर

ट्रायल के दौरान वादी मुकदमा ने कोर्ट में कहा कि उसने गलतफहमी में एफआईआर दर्ज करवा दी थी. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निकांत जैन के खिलाफ न तो रंगदारी का मामला बनता है और न ही भ्रष्टाचार का. कोर्ट ने यह भी पाया कि पूरे प्रकरण में पुलिस को किसी भी तरह की रकम की वसूली या किसी लेनदेन से जुड़े ठोस सबूत नहीं मिले हैं. इस फैसले के बाद अभिषेक प्रकाश को बड़ी राहत मिली है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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