एक ऐसा गांव…जहां लड़कियों को पढ़ाना जरूरी नहीं समझा जाता था। कई बार बड़े सपने देखे भी जाते हैं लेकिन समाज के ताने आगे नहीं बढ़ने देते और कुछ लोग रुक जाते हैं। हालांकि, कुछ अलग करने वाले समाज और लोगों की सोच बदल सकते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है एक किसान की बेटी मोना डांगी (Mona Dangi) ने। उन्होंने MPPSC परीक्षा 12वीं रैंक के साथ क्रैक करके डिप्टी कलेक्टर की पोस्ट हासिल की। उनकी कड़ी मेहनत, आर्थिक चुनौतियां और सामाजिक पाबंदियों से हार न मानने और अपने सपने को पूरा करने के लिए प्रेरित करती है।एक इंटरव्यू में मोना बताती हैं कि वह मध्य प्रदेश अशोक नगर के जिले के छोटे गांव इकोडिया की रहने वाली हैं। उनके गांव में लड़कियों की शिक्षा को प्राथमिकता नहीं जाती है। आमतौर पर 12वीं या ग्रेजुएशन के बाद लड़कियों की शादी की जाती हैं। हालांकि, उनके परिवार ने सामाजिक बाधाओं से आगे सोचा और आगे पढ़ने और बढ़ने के लिए प्रेरित किया।मोना ने अपनी 12वीं की पढ़ाई मुंगावली के सरकारी स्कूल से पूरी की। इसके बाद इंदौर के महारानी लक्ष्मीबाई कन्या कॉलेज से हासिल की। उन्होंने पाॅलिटिकल साइंस में एमए किया। कॉलेज के पहले साल से ही उन्होंने MPPSC की तैयारी शुरू कर दी थी।उनके पिता छोटे किसान थे और वह चार भाई-बहन हैं। उनके पिता घर चलाने के लिए दिनरात कड़ी मेहनत करते थे। पैसे की तंगी अक्सर रहती थी लेकिन एक चीज कभी नहीं रुकी और वह थी मोना की पढ़ाई। उन्होंने अपने इरादे को और मजबूत किया और आगे बढ़ती रहीं।तैयारी के दौरान आर्थिक चुनौतियां ज्यादा बढ़ने लगीं तो मोना ने ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। अपने संघर्ष को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। मोना ने 2022 में 34 रैंक हासिल की। इसके बाद वह वाणिज्य कर निरीक्षक (CTI) बनीं।मोना ने एक नौकरी हासिल कर ली लेकिन अपने सपने को पूरा करने के लिए आगे बढ़ती रहीं। MPPSC 2023 में अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने रैंक-12 हासिल की और बनकर समाज के लोगों को उस सोच को बदल दिया जो बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता नहीं देते थे। अपनी सफलता के बाद मोना ने लड़कियों को शिक्षित करने के लिए अपने क्षेत्र के लोगों से आग्रह किया।
0 2,501 1 minute read





