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बीड़ी बनाने का काम करती है मां, पिता बस कंडक्टर… बेटी ने IPS बन बढ़ाया मान, मोटिवेट करती है इन्बा की कहानी

कहते हैं, ‘जीत की के लिए बस जूनून चाहिए, जिसमे उबाल हो ऐसा खून चाहिए, ये आसमान भी आ जाएगा जमीन पर, बस इरादों में जीत की गूंज चाहिए।’ 25 वर्षीय एस. इन्बा के इरादों की जीत की गूंज आज पूरे देश में है। तमिलनाडु के गरीब परिवार से आने वाली इन्बा ने IPS बनकर न सिर्फ अपने परिवार का मान बढ़ाया है, बल्कि उन तमाम लड़कियों का हौसलों बढ़ाया है जो सीमित संसाधनों में भी कुछ बनने का सपना देख रही हैं। इन्बा की सक्सेस स्टोरी किसी मिसाल से कम नहीं है।

फैक्ट्री में बीड़ी बनाती है मां, पिता बस कंडक्टर

एस. इन्बा, तमिलनाडु के तेनकासी जिले के सेंगोट्टई की रहने वाली हैं। प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचाने जाने वाले इस शहर को दक्षिण तमिलनाडु के प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। इन्बा की मां एक फैक्ट्री में बीड़ी बनाने का काम करती हैं और पिता श्रीनिवासन बस कंडक्टर हैं। आर्थिक तंगी के चलते परिवार का खर्च मुश्किल से चलता है। इन्बा ने परिवार को बेहतर जिंदगी देने के लिए सरकारी नौकरी का सपना देखा था, लेकिन यह इतना आसान नहीं था।

भाई के त्याग और प्रेरणा से मिली सफलता की राह

एस. इन्बा आज जो कुछ भी हैं उसके पीछे भाई का त्याग और प्रेरणा है। इन्बा के भाई बालामुरली आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से ज्यादा नहीं पढ़ पाए। इन्बा ने टीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मेरे पिता श्रीनिवासन भी  हैं, इसलिए हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति

सरकारी योजना से मिला फायदा
सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन पढ़ाई यूपीएससी एग्जाम के लिए काफी नहीं थी। इसलिए इन्बा दो बार यूपीएससी सिविल सर्विसेज प्रीलिम्स में असफल रहीं। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कोशिश जारी रखी। साल 2023 में दूसरे अटेंप्ट में फेल होने के बाद, उन्हें तमिलनाडु सरकार की ‘नान मुधलवन योजना’ के बारे में पता चला, जिसका उद्देश्य गरीब परिवार की लड़कियों को फ्री में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराना है। योजना के तहत 25,000 रुपये की मदद मिली। इस योजना के तहत मिलने वाली 7,500 रुपये की मासिक सहायता ने तैयारी के लिए चेन्नई में रहने में मदद की।

तीसरे अटेंप्ट में IPS बनीं एस. इन्बा
इस बार इन्बा की तैयारी पक्की और हौसला बुलंद था। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 का फॉर्म भरा। यह उनका तीसरा अटेंप्ट था। इस बार उन्होंने प्रीलिम्स, मेन्स और फिर इंटरव्यू तीनों राउंड क्रैक किए और 851वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की। हालांकि यह IAS कैडर के लिए काफी नहीं। उन्होंने IFS या IPS में से IPS को चुना। 2024 बैच की एस. इन्बा कोयंबटूर में एसएसपी के रूप में ट्रेनिंग ले रही हैं। उनका सफर अभी भी जारी है। वे IAS अधिकारी बनने के लिए फिर से यूपीएससी एग्जाम देना चाहती हैं।

अच्छी नहीं थी। मैं भी सोच रही थी कि क्या मुझे परिवार को सहारा देने के लिए नौकरी करनी चाहिए। तब मेरे भाई बालामुरली ने मुझे UPSC परीक्षा देने के लिए सबसे ज्यादा प्रेरित किया। मेरा ज्यादातर खर्च भी भाई ने उठाया।’ बालामुरली ने डिप्लोमा किया है और सऊदी अरब में एक गैस कंपनी में काम करते हैंइन्बा ने साल 2020 में कोयंबटूर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (CIT) से BE कंप्यूटर साइंस की डिग्री हासिल की है। उनका सपना यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास करके IAS बनने का था। कॉलेज से निकलते ही उन्होंने यूपीएससी एग्जाम की प्रिपरेशन शुरू कर दी। सेंगोट्टई में सरकारी पब्लिक लाइब्रेरी इस युवा महिला के लिए ढाई साल तक दूसरा घर बन गई थी। उन्होंने ऑनलाइन क्लासेस लीं।

सरकारी योजना से मिला फायदा

सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन पढ़ाई  के लिए काफी नहीं थी। इसलिए इन्बा दो बार यूपीएससी सिविल सर्विसेज प्रीलिम्स में असफल रहीं। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कोशिश जारी रखी। साल 2023 में दूसरे अटेंप्ट में फेल होने के बाद, उन्हें तमिलनाडु सरकार की ‘नान मुधलवन योजना’ के बारे में पता चला, जिसका उद्देश्य गरीब परिवार की लड़कियों को फ्री में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराना है। योजना के तहत 25,000 रुपये की मदद मिली। इस योजना के तहत मिलने वाली 7,500 रुपये की मासिक सहायता ने तैयारी के लिए चेन्नई में रहने में मदद की।

तीसरे अटेंप्ट में IPS बनीं एस. इन्बा

इस बार इन्बा की तैयारी पक्की और हौसला बुलंद था। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 का फॉर्म भरा। यह उनका तीसरा अटेंप्ट था। इस बार उन्होंने प्रीलिम्स, मेन्स और फिर इंटरव्यू तीनों राउंड क्रैक किए और 851वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की। हालांकि यह IAS कैडर के लिए काफी नहीं। उन्होंने IFS या IPS में से IPS को चुना। 2024 बैच की एस. इन्बा कोयंबटूर में एसएसपी के रूप में ट्रेनिंग ले रही हैं। उनका सफर अभी भी जारी है। वे IAS अधिकारी बनने के लिए फिर से यूपीएससी एग्जाम देना चाहती हैं।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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