अमेठी: सर्दियों का मौसम आते ही इंसानों के साथ-साथ बेजुबान पशुओं की सेहत पर भी संकट मंडराने लगता है. अमेठी और आस-पास के इलाकों में मौसम के उतार-चढ़ाव का असर अब मवेशियों पर साफ दिखने लगा है. अक्सर देखा जाता है कि ठंड बढ़ते ही पशु बीमार पड़ने लगते हैं और उनके दूध देने की क्षमता अचानक से कम हो जाती है. पशु चिकित्सकों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा कारण पशुओं का गलत खान-पान और उन्हें कड़ाके की ठंड में ठंडा पानी पिलाना है. अगर पशुपालक कुछ छोटी-छोटी सावधानियां रखें, तो वे बड़े आर्थिक नुकसान से बच सकते हैं.
भूलकर भी न पिलाएं ठंडा पानी, हो सकती हैं बीमारियां
पशु विशेषज्ञों के मुताबिक, किसान अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं. सबसे बड़ी गलती है पशुओं को सीधे नल या तालाब का बर्फीला ठंडा पानी पिलाना. विशेषज्ञों का कहना है कि पशुओं को हमेशा ताज़ा या हल्का गुनगुना पानी ही देना चाहिए. अगर पशु ठंडा पानी पीता है, तो उसे जुकाम, निमोनिया और पेट की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. इससे पशु की पाचन क्रिया भी बिगड़ जाती है और वह सुस्त पड़ जाता है.पुआल छोड़ें, गेहूं के भूसे पर दें जोर
सर्दियों में अक्सर किसान पशुओं को केवल धान का पुआल या बहेरा खिलाते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पशु की सेहत बिगाड़ सकता है क्योंकि पुआल में पोषक तत्वों की भारी कमी होती है. इससे पशु के शरीर को वह ऊर्जा नहीं मिल पाती जो उसे ठंड से लड़ने के लिए चाहिए. इसलिए पशुओं के आहार में पुआल की जगह गेहूं के भूसे का प्रयोग करना चाहिए, जो उनके लिए कहीं ज्यादा पौष्टिक और लाभदायक होता है.गलत आहार से गिर सकता है दूध का उत्पादन
पशुपालकों की एक छोटी सी लापरवाही उनके मुनाफे को कम कर सकती है. सही पशु आहार (जैसे दाना और खली) की कमी से पशु के शरीर की गर्मी कम हो जाती है, जिससे उसकी बीमारियों से लड़ने की ताकत खत्म हो जाती है. अगर पशु दूध दे रहा है, तो ठंड और गलत खाने की वजह से दूध की मात्रा 10% से 20% तक गिर सकती है. दरअसल, शरीर को गर्म रखने के लिए पशु को ज्यादा ऊर्जा चाहिए होती है, और जब उसे पूरा पोषण नहीं मिलता, तो वह दूध कम करने लगता है.5 बातों का रखें खास ख्याल
पशु चिकित्सक डॉ. बृजेश कुमार पाण्डेय ने पशुपालकों के लिए कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं:
गुनगुना पानी: पशुओं को हमेशा सामान्य तापमान या हल्का गुनगुना पानी ही पिलाएं.
पौष्टिक चारा: चारे में खली, चोकर और मिनरल मिक्सचर की मात्रा बढ़ा दें. केवल सूखा चारा न दें, पुआल के साथ हरा चारा मिलाकर खिलाएं.
गुड़ का जादू: पशु के शरीर को अंदर से गर्म रखने और ऊर्जा देने के लिए उनके चारे में थोड़ी मात्रा में गुड़ जरूर मिलाएं.
बिछावन का इंतजाम: पशुओं को कभी भी गीली जगह या ठंडी जमीन पर न बांधें. उनके नीचे सूखे चारे या टाट की बोरी का बिछावन जरूर करें.
खुले से बचाव: रात के समय पशुओं को खुले में न छोड़ें. उन्हें ऐसी जगह बांधें जहां ठंडी हवा का सीधा झोंका न आए.
डॉ. पाण्डेय कहते हैं कि सर्दियों में पशुओं को सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को गर्म रखने के लिए खिलाएं. सही देख-रेख ही आपके पशु को बीमारी से और आपको आर्थिक नुकसान से बचा सकती है.





