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जयपुर में हाइक्लास शादी करने वाले इंद्रेश उपाध्याय कितने अमीर हैं? एक कथा करने की कितनी फीस लेते हैं महाराज?

मथुरा: वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय पूर्व DSP की बेटी शिप्रा से शादी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में हैं। इंद्रेश उपाध्याय का जन्म 7 अगस्त 1997 को उत्तर प्रदेश के वृंदावन धाम में हुआ था। वृंदावन के रमणरेती में उनका घर है। उनकी शादी हरियाणा के DSP रह चुके हरेंद्र शर्मा की बेटी शिप्रा से हो रही है। उनके विवाह का कार्यक्रम जयुपर में हो रहा है।कथावाचक की इतनी धूमधाम से होती शादी देखकर हर एक के मन में एक ही सवाल है कि आखिर इंद्रेश उपाध्याय की नेटवर्थ कितनी है ? वह एक कथा की कितनी फीस लेते हैं ? अगर आपके भी मन में कुछ ऐसा ही सवाल है तो चलिए जानते हैं कि इंद्रेश उपाध्याय एक कथा का कितना चार्ज करते हैं।इंद्रेश उपाध्याय ने खुद को कथा वाचन और भजन गायन तक ही सीमित नहीं रखा। उन्होंने धर्म, ज्ञान और भक्ति को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया और इसे एक संस्थागत रूप दिया। इसी ध्येय को पूरा करने के लिए उन्होंने ‘भक्तिपथ’ नामक संगठन की स्थापना की इंद्रेश महाराज की संपत्ति कितनी है? इसके बारे में कोई औपचारिक सूचना नहीं हैं। लेकिन उनकी आय का मुख्य स्रोत उनके भजन गायन और कथा वाचन हैंमीडिया रिपोर्टस अनुसार भागवत कथा सेवा की कीमत स्थानीय वक्ताओं के लिए 11 हजार से लेकर 51 हजार तक तो वहीं प्रमुख और प्रसिद्ध कथावाचकों के लिए 51 हजार से लेकर 1 लाख 51 हजार प्रति आयोजन तक बताई गई है। इसके अलावा कथा किस शहर और किस राज्य में हैं। आयोजन समिति या आयोजक का बजट कितना है, ऐसे कई फैक्टर हैं जो कथा वाचन की फीस तय करते हैं हालांकि इंद्रेश जी की फीस कितनी है इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इंद्रेश उपाध्याय की कथाओं की बुकिंग उनके मैनेजर करते हैं। इंद्रेश उपाध्याय की फीस के बारे में सटीक आंकड़े तो सामने नहीं आए हैं, लेकिन कहा जाता है कि बाकी साथ में कथा में आए सदस्यों की फीस और इंद्रेश उपाध्याय की फीस कथा के दिन जोड़कर ही रकम बताई जाती है।कितने पढ़े लिखे हैं इंद्रेश उपाध्याय
इंद्रेश उपाध्याय ने कान्हा माखन पब्लिक स्कूल से शिक्षा प्राप्त की। 13 साल की उम्र में ही उन्हें श्रीमद्भागवत महापुराण कंठस्थ थी। कहा जाता है कि उन्होंने बस स्कूली शिक्षा प्राप्त की है। इसके बाद वह कथाओं और भजन में पिता के साथ जाने लगे।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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