गोंडा: ठंड का मौसम हो या गर्मी का, खेती में नए प्रयोग करने वाले किसान हमेशा कुछ नया सीखने और अपनाने के लिए तैयार रहते हैं. इसी तरह गोंडा जिले के एक किसान ने ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा बढ़ा दी है. यहां पहली बार कुमकुम के पौधे की खेती की गई है, जिसे आमतौर पर पूजा-पाठ, आयुर्वेद और प्राकृतिक रंगों के रूप में उपयोग किया जाता है. इस अनोखे प्रयोग को देखकर कई किसान इसे समझने और अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं.
कुमकुम का पौधा क्या होता है?
किसान सूर्य प्रसाद शुक्ला बताते हैं कि कुमकुम का पौधा अपनी खुशबू और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. इसकी पत्तियां, फूल और जड़ें आयुर्वेदिक उपचारों, घरेलू नुस्खों और धार्मिक कार्यों में काम आती हैं. कुमकुम के फूलों से प्राकृतिक रंग तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग तिलक, पूजा-सामग्री और धार्मिक आयोजनों में होता है.
सूर्य प्रसाद शुक्ला ने बताया कि कुमकुम का पौधा उन्होंने से मंगवाया था. शुरू में कई पौधे लाए गए थे, लेकिन कुछ ही पौधे सुरक्षित रह पाए. फिलहाल उनके यहां तैयार किए गए पौधे अब आसपास के किसानों के लिए भी उपलब्ध हैं, ताकि वे भी इस नई खेती को आजमा सकें.
किसानों को इस पौधे से क्या है फायदा?
शुक्ला बताते हैं कि यदि किसान अपने खेत की मेड़ पर कुमकुम का पौधा लगाते हैं तो उन्हें अच्छी कमाई हो सकती है. एक पौधा किसानों को 3 से 4 हजार रुपये की आय दे सकता है क्योंकि कुमकुम का बीज लगभग 2 हजार रुपये प्रति किलो में बिकता है.
इससे किसानों को बिना ज्यादा मेहनत और खर्च के अतिरिक्त आमदनी का अच्छा मौका मिल सकता है.
पूजा-पाठ और आयुर्वेद में बढ़ती मांग
आजकल प्राकृतिक और ऑर्गेनिक चीजों की मांग काफी बढ़ गई है. मंदिरों, आश्रमों और पूजा सामग्री बेचने वाले व्यापारियों के बीच प्राकृतिक रंग और पौधों से बने उत्पादों की खास मांग है. वहीं, हनुमान जी के लेप में भी कुमकुम के बीज का उपयोग किया जाता है. इसके अलावा बीज को पीसकर चंदन की तरह भी लगाया जा सकता है, जो ठंडक देने में मदद करता है. आयुर्वेदिक उपचारों में भी कुमकुम के पौधे का उपयोग त्वचा रोग, घाव भरने, सिरदर्द और सूजन कम करने में किया जाता है.
किसानों के लिए नई उम्मीद
के किसान सूर्य प्रसाद शुक्ला का यह प्रयोग क्षेत्र में नई उम्मीद पैदा कर रहा है. कुमकुम जैसे उपयोगी और कम मिलने वाले पौधे की खेती से किसानों की आय बढ़ सकती है और प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग को भी पूरा किया जा सकता





