जम्मू। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने काकरोच जनता पार्टी को समर्थन देने के अपने दावे को दोहराते हुए कहा है कि इस संबंध में लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के दावों को खारिज कर दिया।
उपराज्यपाल ने दावा किया था कि वांगचुक काकरोच पार्टी बनने के प्रति आश्वस्त नही हैं व यह मानते हैं कि मणिपुर की तुलना लद्दाख से करने निर्णय की गलती थी। इसके विरोध में वांगचुक ने स्पष्ट कहा कि वह खुद को मानद काकरोच मानते हैं व इस आनलाइन आंदोलन के समर्थन में मजबूती से खड़े हैं। उपराज्यपाल ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया था कि उन्होंने वांगचुक को भ्रामक व भड़काऊ बयानबाजी से बचने की सलाह दी है।
इन दावों को खारिज करते हुए वांगचुक ने कहा है कि उपराज्यपाल के साथ हुई बैठक बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई थी। इसमें किसी प्रकार की चेतावनी या फटकार जैसी बात नहीं थी।
वांगचुक ने कहा कि उपराज्यपाल ने हमें चाय पर चर्चा करने के लिए बुलाया था। करीब एक घंटे तक हमने सौहार्दपूर्ण माहौल में उनके प्रयासों, हमारे कार्यों व सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। लेकिन बैठक के एक घंटे बाद उनका ट्वीट देखकर हम हैरान रह गए। इसमें उनका लहजा बैठक से बिल्कुल अलग था। वांगचुक ने कहा कि संभवत यह सार्वजनिक बयान दिल्ली में किसी बास को खुश करने के लिए दिया गया होगा।वांगचुक ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी मणिपुर वाली टिप्पणी को निर्णय की गलती नहीं कहा। उन्होंने कहा, मैं आज भी अपने बयान पर कायम हूं। मैंने केवल इतना कहा था कि मौजूदा परिस्थिति में उस उदाहरण से बचा जा सकता था। इसे टाला जा सकता था व निर्णय की गलती, दोनों अलग बातें हैं।वहीं काकरोच जनता पार्टी पर उपराज्यपाल के दावों का खंडन करते हुए वांगचुक ने कहा कि उन्होंने कभी भी इस संगठन से दूरी बनाने की बात नहीं कही। उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल ने इस आंदोलन को विदेशी ताकतों व बाहरी फंडिंग से प्रभावित बताया था। लेकिन उन्होंने इन आरोपों को न तो स्वीकार किया और न समर्थन दिया
वांगचुक ने कहा, मैंने कभी नहीं कहा कि मैं इसकी उत्पत्ति को लेकर असमंजस में हूं। मैं आज भी काकरोच पार्टी का बड़ा प्रशंसक हूं। मैं अपने बयान पर कायम हूं कि मैं एक मानद काकरोच हूं और इसका समर्थन करता हूं। उन्होंने कहा कि यदि संगठन की फंडिंग या उत्पत्ति को लेकर कोई प्रमाण सामने आते हैं, तो उन्हें देखने के लिए वह तैयार हैं।
लेकिन इसे समर्थन वापस लेने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वांगचुक ने ‘काकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके से सार्वजनिक रूप से आंकड़े साझा करने की अपील करते हुए कहा कि यदि यह भारतीय युवाओं की पहल है व इसे अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल रहा है, तो यह भारत की रचनात्मक लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति की ताकत को दर्शाता है।





