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3 साल की उम्र में माता-पिता ने छोड़ा, कुत्तों ने मिलकर पाला… उनके बीच रहकर बन गई उनकी तरह, भौंककर करती थी बात, जमीन से खाती थी खाना

दुनिया में कई हैरान करने वाली कहानियां सामने आती हैं, लेकिन यूक्रेन की एक छोटी बच्ची की कहानी आपको इमोशनल कर देगी.  यूक्रेन के एक गरीब गांव में जन्मी Oxana Malaya नाम की बच्ची को उसके माता-पिता ने महज 3 साल की उम्र में अकेला छोड़ दिया था. माता-पिता शराब के आदी थे और उसकी देखभाल नहीं कर पाते थे.

कड़ाके की ठंड से बचने के लिए छोटी सी बच्ची घर से भागकर एक कुत्ते के केनेल  में जा छुपी. वहां उसकी मुलाकात अपने पालतू कुत्ते से हुई, जिसके साथ धीरे-धीरे उसने रहना शुरू कर दिया. यही जगह उसका घर बन गई और यही से शुरू हुई एक ऐसी जिंदगी, जो इंसानों से बिल्कुल अलग थी.

कुत्तों जैसी हो गई आदतें
समय के साथ-साथ Oxana पूरी तरह कुत्तों जैसी हो गई. उसने इंसानों की तरह बोलना लगभग भूल ही गई और कुत्तों की तरह भौंककर ही बात करने लगी. वह चार पैरों पर चलती थी, हांफती थी और जमीन से खाना खाती थी. उसका खाना भी अक्सर कच्चा मांस होता था. खुद को साफ करने के लिए वह जीभ का इस्तेमाल करती थी, ठीक वैसे ही जैसे कुत्ते करते हैं.

8 साल की उम्र में खुला राज
करीब 5 साल तक इसी तरह रहने के बाद जब Oxana 8 साल की हुई, तब उसकी सच्चाई सामने आई. एक दिन उसने एक पड़ोसी पर भौंकना शुरू कर दिया, जिससे लोगों को शक हुआ. इसके बाद पुलिस वहां पहुंची. जब अधिकारी उसे लेने आए, तो कुत्तों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन आखिरकार उन्हें खाना देकर दूर किया गया और बच्ची को वहां से बाहर निकाला गया. साल 1991 में सोशल सर्विस ने उसे अपने पास लिया और फिर उसे इंसानों की दुनिया में वापस लाने की कोशिश शुरू हुई.

इंसानी जिंदगी में लौटना आसान नहीं था
Oxana को एक फोस्टर फैमिली के पास रखा गया, जहां उसे फिर से इंसानों की तरह रहना सिखाया गया. उसे दो पैरों पर चलना, बोलना और सामान्य व्यवहार करना सिखाया गया. हालांकि, इतने साल कुत्तों के साथ बिताने की वजह से उसका विकास पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया. उसका मानसिक विकास एक छोटे बच्चे जैसा ही रह गया. वह आज भी पूरी तरह सामान्य जीवन नहीं जी पाती.

आज भी है खास देखभाल की जरूरत
अब Oxana अपनी 40 की उम्र में एक विशेष देखभाल केंद्र में रह रही है. उसने अपने अतीत को कभी छिपाया नहीं और कई बार खुलकर अपनी कहानी साझा की है. उसने बताया कि उसके माता-पिता के पास इतने बच्चे थे कि वे उसकी देखभाल नहीं कर पाए, जिस वजह से वह सड़कों पर आ गई.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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