छत्तीसगढ़

सेवा की कहानी : माता-पिता का साया छिना, तो जिम्मेदारियों ने थामा हाथ

धमतरी। जीवन में कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं, जो उम्र से पहले ही इंसान को जिम्मेदार बना देती हैं। माता-पिता का साया बचपन में ही उठ जाने के बाद कु. हिमांशी देवी ने भी ऐसे ही कठिन दौर का सामना किया। मुश्किलों के बीच अपने छोटे भाई युवराज का सहारा बनी हिमांशी के जीवन में अब एक नई शुरुआत हुई है। अनुकंपा नियुक्ति के माध्यम से उन्हें शासकीय सेवा का अवसर मिला है। यह नियुक्ति उनके लिए केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत जयंत नाहटा ने जिला पंचायत कार्यालय में हिमांशी को पंचायत सचिव (कर्मी) के पद पर नियुक्ति पत्र सौंपा। नियुक्ति पत्र प्रदान करते हुए उन्होंने हिमांशी को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं और शासकीय सेवा में ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा एवं संवेदनशीलता के साथ दायित्वों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया।

जिला पंचायत धमतरी द्वारा 24 सितंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार ग्राम पंचायत उमरगांव, पोस्ट उमरगांव, विकासखंड नगरी निवासी कु. हिमांशी देवी, पिता स्वर्गीय भानुप्रताप ध्रुव को पंचायत सचिव (कर्मी) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई है। उनकी प्रारंभिक पदस्थापना जनपद पंचायत नगरी में की गई है। यहां उन्हें दो माह का उन्मुखीकरण प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिक्त ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर उनकी पदस्थापना की जाएगी। नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि के लिए होगी।

कम उम्र में उठी परिवार की जिम्मेदारी

हिमांशी के पिता स्वर्गीय भानुप्रताप ध्रुव शासकीय सेवा में कार्यरत थे। स्वास्थ्य खराब होने के बाद तीन माह तक बीमारी से जूझते हुए उनका निधन हो गया। उनके सेवाकाल में अभी लगभग 12 वर्ष शेष थे। इससे पहले ही हिमांशी के जन्म के बाद उनकी माता स्वर्गीय रयमोतिन बाई का भी निधन हो चुका था। माता-पिता दोनों को असमय खो देने के बाद हिमांशी और उनके छोटे भाई युवराज के सामने जीवन की अनेक चुनौतियां खड़ी हो गईं। ऐसे समय में हिमांशी ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय अपने छोटे भाई के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझा। परिवार के लिए सहारा बनने का संकल्प उनके जीवन की दिशा बन गया। अब शासकीय सेवा में नियुक्ति मिलने से उनके सामने आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अपने छोटे भाई युवराज के भविष्य को बेहतर बनाने का अवसर भी आया है।

नियुक्ति पत्र बना नई उम्मीद का दस्तावेज

हिमांशी के लिए जिला पंचायत कार्यालय से मिला नियुक्ति पत्र एक शासकीय आदेश से कहीं अधिक मायने रखता है। यह उस संघर्षपूर्ण यात्रा में नई उम्मीद का दस्तावेज है, जिसमें उन्होंने कम उम्र में ही अपने माता-पिता को खोया और परिवार की जिम्मेदारियों का सामना किया। अनुकंपा नियुक्ति ने उन्हें सम्मानजनक आजीविका का अवसर प्रदान करने के साथ अपने जीवन को नई दिशा देने का आधार दिया है। शासकीय सेवा में प्रवेश के साथ हिमांशी अब अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। पंचायत सचिव के रूप में उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में शासन की योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने, पंचायत स्तर पर प्रशासनिक कार्यों के संचालन तथा ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा। व्यक्तिगत संघर्ष से निकली उनकी यह नई जिम्मेदारी उन्हें अपने जैसे अनेक परिवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना सकती है।

भाई के भविष्य को संवारने का संकल्प

सेवा संकल्प अभियान को  मानते हुए नियुक्ति मिलने के बाद हिमांशी के सामने अब अपने छोटे भाई युवराज की जिम्मेदारी को मजबूती से निभाने का संकल्प है। कठिन परिस्थितियों में दोनों भाई-बहन ने जिस संघर्ष का सामना किया, अब उसी संघर्ष को उम्मीद और आत्मनिर्भरता में बदलने का अवसर उन्हें मिला है। हिमांशी की कहानी बताती है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अवसर और सहयोग मिलने पर जीवन को नई दिशा दी जा सकती है। अनुकंपा नियुक्ति के माध्यम से मिली शासकीय सेवा उनके लिए सम्मानजनक आजीविका, आत्मनिर्भरता और परिवार के सुरक्षित भविष्य की नई शुरुआत है। इस अवसर पर जिला पंचायत के लेखाधिकारी चंदन टंडन एवं उपसंचालक पंचायत विभाग पद्मनी वर्मा सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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Manoj Mishra

Editor in Chief

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