छत्तीसगढ़

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जन्मजात एवं हृदय रोगों का किया निःशुल्क उपचार

*राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जन्मजात एवं हृदय रोगों का किया निःशुल्क उपचार*

कवर्धा, सितंबर 2026। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के अंतर्गत जिले के बच्चों में विभिन्न जन्मजात एवं गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार स्क्रीनिंग एवं उपचार की कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में आर.बी.एस.के. श्रेणी-ए के अंतर्गत जिले में पिछले 3 वर्षों में 60 बच्चों का हृदय रोग का सफल उपचार, 21 बच्चों के कटे-फटे होंठ एवं तालु (क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट) का ऑपरेशन, 05 बच्चों के टेढ़े-मेढ़े पैर (क्लब फुट) एवं 04 बच्चों की नवजात बधिरता जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सफल उपचार कराया जा चुका है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के सभी शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों, अनुदान प्राप्त विद्यालयों, आवासीय विद्यालयों, आश्रम एवं छात्रावासों में अध्ययनरत बालक-बालिकाओं तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों की चिरायु दल द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की जाती है। चिरायु दल में चिकित्सक, फार्मासिस्ट, लैब टेक्निशियन एवं ए.एन.एम. शामिल होते हैं। दल द्वारा वर्ष में एक बार सभी विद्यालयों तथा वर्ष में दो बार सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों का भ्रमण कर बच्चों की स्वास्थ्य जांच, स्वास्थ्य संबंधी परामर्श एवं आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाता है। जांच के दौरान किसी बच्चे में गंभीर बीमारी अथवा जन्मजात विकृति के लक्षण पाए जाने पर उसे आगे की जांच एवं उपचार के लिए चिरायु वाहन के माध्यम से शासन द्वारा अनुबंधित शासकीय एवं निजी अस्पतालों में भेजा जाता है। आवश्यकता पड़ने पर बच्चों का उपचार छत्तीसगढ़ शासन से अनुबंधित राज्य के बाहर के अस्पतालों में भी निःशुल्क कराया जाता है।

*छोटे बच्चों में हृदय रोग के प्रमुख संकेत*

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सलिल मिश्रा ने बताया कि छोटे बच्चों में हृदय रोग के कुछ प्रमुख संकेत हो सकते हैं। इनमें दूध पीने में परेशानी, स्तनपान या फीडिंग के दौरान जल्दी थक जाना या हांफने लगना, दूध पीते या रोते समय अधिक पसीना आना, होंठ, जीभ या नाखूनों का नीला अथवा बैंगनी पड़ जाना, पर्याप्त भोजन के बावजूद वजन एवं शारीरिक विकास में अपेक्षित वृद्धि नहीं होना तथा आराम या नींद के दौरान भी तेज सांस चलना शामिल हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि बच्चों में उपरोक्त में से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज न करें और तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें। समय पर स्वास्थ्य जांच एवं बीमारी की शीघ्र पहचान से बच्चों को उचित उपचार उपलब्ध कराकर उनके स्वस्थ जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। जिले के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है। आर.बी.एस.के. के माध्यम से बीमारी की पहचान से लेकर उपचार तक की प्रक्रिया को प्रभावी बनाते हुए पात्र बच्चों को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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