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रणवीर सिंह की 13 साल पुरानी फिल्म का ये गाना असल में है गुजरात का लोकगीत, काफी दिलचस्प है इसकी कहानी

नई दिल्ली। साल 2013 में दीपिका पाडुकोण और रणवीर सिंह की फिल्म राम-लीला का गाना मन मोर बनी थंगाट करे, जरूर सुना होगा। ये गाना काफी पॉपुलर हुआ था, लेकिन क्या आप जानते हैं ये गाना असल में गुजरात का एक लोकगीत है? जी हां, ये गाना गुजरात का एक लोकगीत है, जिसे अक्सर डायरों और गरबा खेलते हुए गाया जाता है। हालांकि, इस लोकगीत की कहानी 126 साल पहले लिखी गई एक कविता से भी जुड़ा है। आइए जानें कैसे एक कविता से बना ये लोकगीत, जिसे संजयलीला भंसाली ने अपनी फिल्म का हिस्सा बनाया। 

कैसे हुई इस गीत की शुरुआत?

इस गाने की शुरुआत 20वीं शताब्दी के बिल्कुल शुरुआत में हुई थी। साल 1900 में रवींद्रनाथ टैगोर ने शिलाईदह प्रवास के दौरान नववर्षा नाम की एक बंगाली कविता लिखी थी। इस कविता में उन्होंने बारिश के आगमन की खुशी और नई शुरुआत के बारे में लिखा था और इसकी खुशी में नाचते दिलों की तुलना उन्होंने थिरकते हुए मोर से की थी।इस कविता के दो दशक बाद, यानी 1920 में गुजरात के मशहूर लेखक और राष्ट्रीय शायर कहलाने वाले झवेरचंद मेघानी कोलकाता में   के घर गए और उनसे ये कविता सुनी। टैगोर की आवाज और कविता की लयबद्धता ने मेघानी को अंदर तक झकझोर दिया।

इस कविता से वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसे अपनी मातृभाषा गुजराती में ढालने का फैसला किया। साल 1944 में मेघानी ने टैगोर की कविताओं के अपने गुजराती अनुवाद संग्रह रवींद्र-वीणा में इस कविता को मोर बनी थंगाट करे के नाम से पब्लिश किया। 

बंगाली कविता बनी गुजराती लोकगीत

झवेरचंद मेघानी ने इस कविता का सिर्फ अनुवाद नहीं किया। उन्होंने इसे पूरी तरह से गुजरात की संस्कृति के रंग में रंग दिया। उन्होंने बंगाली भाव को  से ऐसे जोड़ा कि ये अपने आप में एक मूल गुजराती रचना लगती है। 

इस कविता को गायक हेमू गढ़वी ने अपना संगीत दिया और इसे सौराष्ट्र के पारंपरिक लोक-धुनों से जोड़ा। इस गाने की धुन इतनी पसंद की गई कि इस गीत को सुनने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ने लगी और देखते ही देखते ये गुजरात के लोकगीतों में शामिल हो गया। 

लोकगीत से बॉलीवुड का सफर

ये गीत भारत के पूर्व और पश्चिम के लोक संगीत से मिलकर बना है। इसमें बारिश के मौसम का ऐसा वर्णन है कि सुनने वाले के पांव अपने आप थिरकने लगते हैं। इसकी धुन और लिरिक्स इतने पसंद किए गए कि इसे साल 2013 में संजयलीला भंसाली की फिल्म गोलियों की रासलीला: राम-लीला में भी फिल्माया गया। हालांकि, फिल्म में इसकी धुन में बदलाव किए गए हैं, लेकिन ये गाना इस फिल्म की तरह ही सुपरहिट रहा। 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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