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अरबी की खेती से 10 हजार लगाकर कमाएं सवा लाख, जान लें ये वाला तरीका

अरबी की खेती से 10 हजार लगाकर कमाएं सवा लाख, जान लें ये वाला तरीका

अगर आप पारंपरिक खेती से हटकर कम समय और बेहद कम लागत में एक बड़ा मुनाफा कमाना चाहते हैं. तो अरबी की खेती आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. अरबी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसानों को डबल इनकम का मौका देती है क्योंकि बाजार में इसके कंद यानी अरबी की भारी डिमांड तो रहती ही है.

तो वहीं इसके साथ ही इसके हरे पत्तों की भी खूब बिक्री होती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इस फसल में बीमारी और कीटों का खतरा न के बराबर होता है. जिससे देखरेख का खर्च भी बच जाता है. चलिए आपको बताते हैं कैसे आप अरबी की खेती से लाखों की बंपर कमाई कर सकते हैं.

अरबी की खेती से कमाएं सवा लाख

अरबी की खेती को मुनाफे का सौदा इसलिए माना जाता है. क्योंकि इसकी हार्वेस्टिंग दो अलग-अलग चरणों में होती है. बुवाई के महज 40 से 50 दिनों के भीतर इसके पौधे बड़े हो जाते हैं और इनके पत्तों की कटाई शुरू की जा सकती है. जिनका इस्तेमाल पकौड़े और कई तरह के लजीज व्यंजन बनाने में होता है. इसके पत्तों को बाजार में बेचकर किसान अपनी रोजमर्रा की लागत और जेब का खर्च आसानी से निकाल लेते हैं.

इसके बाद जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाती है. तो जमीन के नीचे से निकलने वाले कंद यानी अरबी को थोक और रिटेल मार्केट में ऊंचे दामों पर बेचा जाता है. इस तरह पत्तों और कंद दोनों की बिक्री से किसानों की जेब में चौतरफा पैसा आता है. इसमें कुल लागत 10 हजार के करीब आती है तो वहीं आप इससे सवा लाख रुपये तक का मुनाफा छाप सकते हैं.

बुवाई का सही समय 

अरबी से तगड़ी कमाई करने के लिए इसकी बुवाई सही समय और सही तकनीक से करना बेहद जरूरी है. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक जून और जुलाई का महीना अरबी की बुवाई के लिए सबसे सही माना जाता है. क्योंकि इस समय की बारिश पौधों की ग्रोथ में मदद करती है. खेत तैयार करते समय अच्छी मात्रा में गोबर की खाद या जैविक खाद जरूर मिलाएं जिससे मिट्टी भुरभुरी और उपजाऊ बनी रहे.

बंपर पैदावार पाने का तरीका

कंदों को हमेशा लाइनों में बोएं और पानी निकलने का सही बंदोबस्त रखें जिससे पानी लगने से कंद सड़ने न पाएं. अरबी उगा रहे किसानों का मानना है कि उन्नत किस्मों का चुनाव और सही दूरी पर बुवाई ही इस फसल से रिकॉर्ड तोड़ पैदावार पाने का असली सीक्रेट है.

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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