वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले में बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलेगा। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत उद्यान और वन आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए 4.76 लाख फलदार और इमारती लकड़ी के पौधे लगाए जाएंगे। विभाग ने वी बीजी रामजी योजना के तहत इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है। अभियान का लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण है। किसानों की आय बढ़ाना भी उद्देश्य है। डीएम ने इस योजना को सफल बनाने को लेकर दिशा-निर्देश दिया है। वहीं बताया गया है कि योजना के अनुसार निजी भूमि पर व सार्वजनिक भूमि पर भी पौधरोपण होगा। पंचायतों, विद्यालय परिसरों, सरकारी संस्थानों में पौधे लगाए जाएंगे। किसानों के खेतों में भी पौधरोपण कराया जाएगा। फलदार पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी। आम, अमरूद, लीची सहित कई फलदार पौधों पर जोर रहेगा। इनसे किसानों को आगे चलकर अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा। विभाग का मानना है कि बागवानी आधारित खेती किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगी। फलदार पौधों के साथ शीशम, सागवान, अर्जुन जैसी इमारती लकड़ी वाली प्रजातियों के पौधे भी लगाए जाएंगे। इन पेड़ों से लंबे समय में किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा। विभाग के अधिकारी गौतम कुमार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 4.76 लाख इमारती पौधे लगाए जाएंगे। अभियान विस्तार पर फोकस रहेगा। किसानों की आय वृद्धि पर फोकस रहेगा। पौधरोपण और रखरखाव में ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
बताया गया है कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल सकेगा। अभियान के दौरान गड्ढा खोदने का काम होगा। पौधों की देखरेख होगी। सिंचाई और संरक्षण का काम होगा। इन कामों में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रोजगार मिलेगा। पौधरोपण से जिले का हरित आवरण बढ़ेगा। जलवायु संतुलन बनेगा। साथ ही भू-क्षरण रुकेगा। पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलेगा।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले में बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलेगा। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत उद्यान और वन आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए 4.76 लाख फलदार और इमारती लकड़ी के पौधे लगाए जाएंगे। विभाग ने वी बीजी रामजी योजना के तहत इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है। अभियान का लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण है। किसानों की आय बढ़ाना भी उद्देश्य है। डीएम ने इस योजना को सफल बनाने को लेकर दिशा-निर्देश दिया है। वहीं बताया गया है कि योजना के अनुसार निजी भूमि पर व सार्वजनिक भूमि पर भी पौधरोपण होगा। पंचायतों, विद्यालय परिसरों, सरकारी संस्थानों में पौधे लगाए जाएंगे। किसानों के खेतों में भी पौधरोपण कराया जाएगा। फलदार पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी। आम, अमरूद, लीची सहित कई फलदार पौधों पर जोर रहेगा। इनसे किसानों को आगे चलकर अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा। विभाग का मानना है कि बागवानी आधारित खेती किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगी। फलदार पौधों के साथ शीशम, सागवान, अर्जुन जैसी इमारती लकड़ी वाली प्रजातियों के पौधे भी लगाए जाएंगे। इन पेड़ों से लंबे समय में किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा। विभाग के अधिकारी गौतम कुमार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 4.76 लाख इमारती पौधे लगाए जाएंगे। अभियान विस्तार पर फोकस रहेगा। किसानों की आय वृद्धि पर फोकस रहेगा। पौधरोपण और रखरखाव में ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
बताया गया है कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल सकेगा। अभियान के दौरान गड्ढा खोदने का काम होगा। पौधों की देखरेख होगी। सिंचाई और संरक्षण का काम होगा। इन कामों में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रोजगार मिलेगा। पौधरोपण से जिले का हरित आवरण बढ़ेगा। जलवायु संतुलन बनेगा। साथ ही भू-क्षरण रुकेगा। पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलेगा।





