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मुर्गी की यह किस्म है खास, 24 माह तक रोजाना अंडा उत्पादन की क्षमता, छोटी पूंजी और कम देखभाल में अच्छा मनाफा

रांची: झारखंड सरकार द्वारा मोराबादी मैदान में आयोजित तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेले में किसानों और महिला समूहों को आधुनिक कृषि एवं पशुपालन तकनीकों से जोड़ने के लिए कई जानकारीपूर्ण स्टॉल लगाए गए. मेले में विशेषज्ञों द्वारा खेती के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसरों पर प्रशिक्षण दिया गया. जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने के नए रास्ते खुल रहे हैं.

मेले में बरपोखर महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के प्रतिनिधि आशीष कुमार ने बताया कि कंपनी झारखंड के सभी 24 जिलों में 100 लेयर बर्ड मॉडल (केज सिस्टम) के तहत कार्य कर रही है. इस योजना का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों और व्यक्तिगत लाभुकों को वैज्ञानिक तरीके से मुर्गी पालन से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है. उन्होंने बताया कि इस मॉडल के तहत लाभुकों को मुर्गी पालन शुरू करने के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं. जिससे शुरुआती स्तर पर किसी प्रकार की तकनीकी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता.

कम देखभाल में अच्छा मुनाफा
उन्होंने बताया कि इस योजना की कुल लागत लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये है. इसमें बीवी-300 लेयर बर्ड, केज सिस्टम, शेड, एक महीने का फीड और आवश्यक दवाइयां शामिल रहती हैं. इसके अलावा कंपनी लाभुकों को प्रशिक्षण, नियमित तकनीकी मार्गदर्शन और जरूरत पड़ने पर वेटरनरी डॉक्टर की सहायता भी उपलब्ध कराती है. इससे नए लोगों के लिए भी मुर्गी पालन का व्यवसाय आसान हो जाता है.

24 महीने तक लगातार अंडा उत्पादन की क्षमता
उन्होंने बताया कि बीवी-300 लेयर प्रजाति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अंडा उत्पादन क्षमता है. यह मुर्गी लगभग 24 महीने तक प्रतिदिन एक अंडा देने में सक्षम होती है, जिससे नियमित आय का स्रोत बनता है. उन्होंने बताया कि पहले चूजों का 90 दिनों तक ब्रूडिंग कराया जाता है. इसके बाद इन्हें लाभुकों के जिले में भेजा जाता है. जहां 25 से 30 दिनों तक स्थानीय वातावरण के अनुकूल होने के बाद मुर्गियां अंडा देना शुरू कर देती हैं.

अंडा उत्पादन के लिए मुर्गे की जरूरत नहीं
उन्होंने बताया कि बीवी-300 लेयर मुर्गियां व्यावसायिक अंडा उत्पादन के लिए विकसित की गई हैं. इस कारण अंडा उत्पादन के लिए मुर्गे की आवश्यकता नहीं होती. जिससे पालन की लागत और देखभाल दोनों सरल हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं या व्यक्तिगत लाभुक घर पर कम जगह और कम देखभाल में इस मॉडल को अपनाकर हर महीने लगभग 15 हजार तक की अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं. इससे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और परिवार की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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