पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (एआईटीडब्ल्यूए) ने देशभर में मालभाड़ा 2.5 से 3% तक बढ़ाने के संकेत दिए हैं। एआईटीडब्ल्यूए के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक गोयल ने कहा कि डीजल, टायर, टोल, लुब्रिकेंट और बीएस-6 वाहनों में इस्तेमाल होने वाले डीईएफ/यूरिया की लागत लगातार बढ़ रही है।
ऐसे में ट्रांसपोर्ट कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। लागत बढ़ेगी तो माल भाड़ा बढ़ाना मजबूरी होगा। ढुलाई लागत बढ़ने का असर सब्जी, ऑनलाइन डिलीवरी, एफएमसीजी, सीमेंट और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर पड़ सकता है।
हालांकि, भोपाल के ट्रांसपोर्टर्स फिलहाल किराया बढ़ाने के पक्ष में नहीं दिख रहे। भोपाल ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश चंदवानी ने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात और बढ़ती चुनौतियों के बीच ट्रांसपोर्टर सरकार के साथ खड़े रहना चाहते हैं। हमारी कोशिश है कि भाड़ा नहीं बढ़ाएं। इसके लिए चारों महानगरों के साथ दिल्ली में बात चल रही है।
प्रदेश में अभी 34 से 35 रुपए किमी किराया भोपाल ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश चंदवानी ने भास्कर से बातचीत में कहा कि डीजल, टायर, लुब्रिकेंट और अन्य ऑपरेशनल खर्च जरूर बढ़े हैं, लेकिन फिलहाल संगठन मालभाड़ा बढ़ाने से बचने की कोशिश कर रहा है। संचालन मुश्किल हुआ, तभी कोई फैसला लिया जाएगा।
मध्यप्रदेश में ट्रक पर अभी प्रति किमी 34 से 35 रुपए माल भाड़ लग रहा है। हालांकि, प्रदेश में डीजल के रेट अन्य राज्यों की तुलना में अधिक हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्टर दिल्ली, यूपी, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जाते हैं तो एक तरफ से डीजल का खर्च कुछ कम हो जाता है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि फिलहाल इसी तरह से काम चलाएंगे।
अनाज के साथ ही शहर से हार्डवेयर और मशीनरी का अधिक परिवहन भोपाल जिले में करीब 700 ट्रांसपोर्टर सक्रिय हैं। शहर से रोजाना 5 से 7 हजार मालवाहक गाड़ियों की आवाजाही होती है, जबकि कुल वाहन मूवमेंट 10 से 25 हजार के बीच रहता है। भोपाल और आसपास से सबसे अधिक अनाज का परिवहन होता है। इसके अलावा हार्डवेयर, मशीनरी और कृषि उत्पादों की बड़े स्तर पर सप्लाई होती है।
कंज्यूमर पर सीधा असर बहुत कम, बिचौलिए दाम बढ़ाते हैं पंजवानी ने दावा किया कि भाड़े में 3% वृद्धि का असर सीधे आम उपभोक्ता पर बहुत कम पड़ता है। कई बार व्यापारी और स्टॉकिस्ट ट्रांसपोर्ट लागत का हवाला देकर बाजार में कीमतें बढ़ा देते हैं। यदि इंदौर-भोपाल रूट पर 15 हजार रुपए भाड़े में 500 रुपए का अतिरिक्त खर्च बढ़ता है, तो उसका असर ग्राहक पर बेहद मामूली होता है। लेकिन बिचौलिए इसे बढ़ा देते हैं।
ऑल इंडिया स्तर पर अब भी चर्चा जारी: मध्यप्रदेश के ट्रांसपोर्टरों और ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच लगातार चर्चा चल रही है, लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। पंजवानी ने कहा कि फिलहाल कोशिश यही है कि जितना संभव हो लागत को नियंत्रित कर मालभाड़ा न बढ़ाया जाए।





