छत्तीसगढ़

नौतपा से पहले देवपुर में लगा नेचर कैंप, समर कैंप में रोमांच के साथ बच्चों को मिली पर्यावरण से जुड़ी सीख

 

बलौदा बाजार: गर्मी की छुट्टियों में अगर बच्चों को जू या फिर अभयारण्य घूमने को मिल जाए, तो वो खुशी झूम उठते हैं. खासकर बलौदा बाजार का बारनवापारा अभयारण्य. बारनवापारा अभयारण्य छत्तीसगढ़ के बेस्ट टूरिस्टे डेस्टिनेशन में से एक है. बच्चों के लिए यहां देवपुर में एक नेचर कैंप का आयोजन किया गया. बच्चों ने प्रकृति की गोद में बैठकर समर कैंप के रोमांच को तो महसूस किया ही, साथ ही खुली पाठशाला के जरिए पर्यावरण और जीव संरक्षण के गुर भी सीखे. समर कैंप में शामिल हुए बच्चों ने यहां जंगल ट्रैक, बर्ड वॉचिंग, टेंट कैंपिंग, सफारी और सिरपुर का दौरा कर वहां की चीजें देखी.

जंगल के बीच लगी बच्चों की क्लास

16 मई से 22 मई तक चले इस समर कैंप में 65 से अधिक बच्चों ने भाग लिया. खास बात यह रही कि इसमें केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश से भी छात्र पहुंचे. नेचर कैंप का उद्देश्य बच्चों को प्रकृति के करीब लाना और उन्हें किताबों से अलग वास्तविक अनुभवों के जरिए सीखने का मौका देना रहा. सुबह की शुरुआत जंगल ट्रैक से होती थी. बच्चे जंगल की पगडंडियों पर चलते हुए पेड़ों, पौधों और पक्षियों की दुनिया को करीब से समझते थे. कई बच्चों के लिए यह पहली बार था जब उन्होंने जंगल को सिर्फ टीवी या किताबों में नहीं, बल्कि अपनी आंखों के सामने जीवंत देखा.

बर्ड वॉचिंग ने बढ़ाई उत्सुकता

समर कैंप की सबसे खास गतिविधियों में बर्डिंग यानी बर्ड वॉचिंग शामिल रही. बच्चों को अलग-अलग पक्षियों की पहचान कराई गई और उनके व्यवहार के बारे में बताया गया. सुबह की शांत हवा में पक्षियों की आवाज सुनते हुए बच्चे उन्हें पहचानने की कोशिश करते थे. दूरबीन के जरिए पक्षियों को देखने का अनुभव बच्चों के लिए बेहद रोमांचक रहा. वन विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने बच्चों को बताया कि जंगल का संतुलन बनाए रखने में पक्षियों की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है.

टेंट कैंपिंग ने बढ़ाया आत्मविश्वास

रात के समय बच्चों के लिए टेंट कैंपिंग का आयोजन किया गया. खुले आसमान के नीचे दोस्तों के साथ रहना, खुद अपनी छोटी-छोटी जिम्मेदारियां निभाना और प्रकृति के बीच समय बिताना बच्चों के लिए बिल्कुल नया अनुभव साबित हुआ. इस दौरान बच्चों में टीमवर्क, अनुशासन और आत्मविश्वास भी विकसित हुआ. कई बच्चों ने कहा कि उन्होंने पहली बार मोबाइल और इंटरनेट से दूर इतना आनंद मिला है.

गेम्स और आउटडोर एक्टिविटी ने बढ़ाया उत्साह

कैंप में बच्चों के लिए प्रकृति से जुड़ी कई रोचक गेम्स और रचनात्मक गतिविधियां भी आयोजित हुई. गतिविधियों के जरिए बच्चों को पर्यावरण संरक्षण, जंगलों का महत्व और वन्यजीवों के बारे में आसान और मजेदार तरीके से समझाया गया. आउटडोर एक्टिविटी के दौरान बच्चों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना सीखा, जिससे उनमें सहयोग और नेतृत्व की भावना भी विकसित हुई

जंगल सफारी में रोमांच और एडवेंचर का मिला मजा

बारनवापारा अभयारण्य की जंगल सफारी बच्चों के लिए सबसे यादगार अनुभवों में से एक रही. सफारी के दौरान बच्चों ने जंगल के प्राकृतिक वातावरण को करीब से देखा. वन्यजीवों के रहन-सहन, जंगल की संरचना और जैव विविधता के बारे में जंगल से जुड़े एक्सपर्ट ने दी. जंगल में हर आवाज, हर हलचल बच्चों के लिए रोमांच से भरी हुई थी.प्रकृति के साथ-साथ बच्चों को इतिहास और संस्कृति से जोड़ने के लिए सिरपुर का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया. सिरपुर की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों को देखकर बच्चों ने प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को जाना और समझा. विशेषज्ञों ने उन्हें प्राचीन स्थापत्य, इतिहास और उस दौर की जीवन शैली के बारे में जानकारी दी. इस भ्रमण ने बच्चों को यह समझने में मदद की कि प्रकृति और संस्कृति दोनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं.

जैव विविधता दिवस पर मिला खास अनुभव

विश्व जैव विविधता दिवस के अवसर पर बच्चों को विशेष “बायोडायवर्सिटी ट्रेल” पर ले जाया गया. यह गतिविधि समर कैंप का सबसे शिक्षाप्रद हिस्सा मानी जा रही है. यहां स्थानीय वैद्यों ने बच्चों को औषधीय पौधों की जानकारी दी गई. बच्चों ने जाना कि जंगलों में पाए जाने वाले कई पौधे दवाइयों के रूप में उपयोग किए जाते हैं और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में उनका कितना महत्व है. इस दौरान बच्चों को जैव विविधता संरक्षण का महत्व भी समझाया गया.

यादगार रहा कैंप और सफर

कैंप में शामिल बच्चों ने इसे अपने जीवन का सबसे अलग और यादगार अनुभव बताया. कई बच्चों ने कहा कि उन्होंने पहली बार प्रकृति को इतने करीब से महसूस किया. किसी ने पहली बार जंगल में ट्रैकिंग की, तो किसी ने पहली बार टेंट में रात बिताई. कुछ बच्चों ने कहा कि अब वे पर्यावरण संरक्षण के महत्व को पहले से ज्यादा समझ पाए.

प्रकृति से जुड़ाव की जरूरत क्यों?

  • मानसिक संतुलन होता है बेहतर
  • रचनात्मक सोच होती है विकसित
  • पर्यावरण के प्रति बढ़ती है संवेदनशीलता
  • आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता होती है मजबूत

देवपुर नेचर कैंप में लगी बच्चों की खुली पाठशाला

एक ओर जहां बच्चे गर्मी की छुट्टियों में मोबाइल और टीवी स्क्रीन से चिपके हुए हैं वहीं समर कैंप में गए ये बच्चे डिजिटल दुनिया से दूर प्रकृति की गोद में जीवन का असली आनंद ले रहे हैं. बारनवापारा अभयारण्य अंतर्गत आयोजित इस विशेष समर कैंप ने बच्चों को सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि प्रकृति को समझने और उससे जुड़ने का अनोखा अवसर भी

 

दिया.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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