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दो बार UPSC प्री-मेंस क्वालिफाई… सपना तो था अधिकारी बनने का, लेकिन आज पिता की दुकान को आगे बढ़ा रहा ये शख्स

मऊ: कहते हैं कि यह जरूरी नहीं जो सपना देखा जाए, वह सपना पूरा ही हो. सपने भले ही पूरे ना हो तब भी अपना दूसरा रोजगार करके अपने साथ दूसरों को रोजगार दिया जा सकता है. उसी का उदाहरण है मऊ जनपद के सैदपुर मोहल्ले के रहने वाले उधम सिंह की कहानी, जो काफी अलग है. सपना तो था अधिकारी बनने का, लेकिन अधिकारी तो नहीं बने पर हार भी नहीं मानी. आज वह खुद का बिजनेस कर तीन लोगों को रोजगार दे रहे हैं.उधम सिंह बताते हैं कि उनका जन्म 26 जनवरी 1990 को हुआ और उन्होंने टाउन इंटर कॉलेज से 2004 में हाई स्कूल पास किया. इस कॉलेज से 2006 में इंटर पास किया और वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल यूनिवर्सिटी से 2009 में B.A. और फिर 2011 में M.A. पास किया. फिर दोस्त और परिवार वालों ने हिम्मत बढ़ाया और वह 2012 में यूपीएससी की तैयारी करने इलाहाबाद चले गए. हालांकि यूपीएससी की तैयारी के दौरान काफी कठिन भरा सफर रहा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 2016 में प्री और मेंस की परीक्षा उन्होंने निकाल ली. लेकिन अधिकारी बनने का सपना उनका अधूरा रह गया.दो बार पास किया प्री-मेंस
एक बार फिर उन्होंने मेहनत की और 2019 में फिर प्री-मेंस की परीक्षा पास की, लेकिन परीक्षा पास करने के दौरान परिवार में कुछ ऐसी दिक्कत आई कि उन्हें इलाहाबाद छोड़कर घर आना पड़ा. वहीं परेशानियां इतनी बढ़ी कि कुछ महीने भागम-भाग की वजह से उनका अधिकारी बनने का सपना अधूरा रह गया. अधिकारी बनने का सपना तो अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने अपने जीवन में सफल होने की संघर्ष की कहानी नहीं छोड़ी और हिम्मत नहीं हारे. घर आकर 2024 में पिता की ओर से शुरू की गई एक छोटी सी दुकान को संभाल लिया. दुकान पर इतना संघर्ष किया कि आज फोटो फ्रेम की अपनी दुकान को उन्होंने बड़ा बना लिया है. उनके यहां तीन लोग आज काम करते हैं.खुद रोजगार स्थापित कर तीन लोगों को दे रहे रोजगार
उधम सिंह बताते हैं कि अधिकारी बनने का सपना आज भी उनका ऐसे ही बना है और आज भी वह प्रयास कर रहे हैं. हालांकि पहले बाहर रहकर कोचिंग के माध्यम से परीक्षा देने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन आज वह दुकान पर काम करते हुए भी परीक्षाओं की तैयारी करते रहते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और उन्हें घर जाकर परिवार को मजबूत करने के लिए दुकान संभालना पड़ा.आज वह खुद रोजगार तो कर ही रहे हैं, अपने साथ तीन अन्य लोगों को रोजगार दे रहे हैं और साथ में पढ़ाई कर रहे हैं. उनका सपना आज भी अधिकारी बनने का है, लेकिन रोजगार चलते हुए वह तैयारी कर रहे हैं. अब उनका कहना है कि पहले तो सिर्फ हमारा परिवार था, लेकिन अब हमारे साथ तीन और परिवार जुड़ गया है. इस वजह से उनका ख्याल रखते हुए आज वह दुकान पर काम करते हुए तैयारी कर रहे हैं

Manoj Mishra

Editor in Chief

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