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11वीं में छूटा पिता का साया, कैंसर ने छीनी मां, हर वीडियो कॉल का लेते थे स्क्रीनशॉट, UPSC में मिली रैंक 2

अनिमेष प्रधान को आईएएस अफसर बनकर मां को दिया हुआ वचन निभाना था. अनिमेष के सिर से पिता का साया पहले ही उठ चुका था और मां की हालत हर गुजरते दिन के साथ बिगड़ रही थी. इंडियन ऑयल जैसी बड़ी कंपनी में फुल-टाइम नौकरी, मां की कीमोथेरेपी के लिए अस्पताल के चक्कर और फिर रातों को जागकर लक्ष्मीकांत और स्पेक्ट्रम पढ़ना- यह किसी साधारण इंसान के बस की बात नहीं थी. लेकिन अनिमेष ने हार नहीं मानी और यूपीएससी 2023 में दूसरी रैंक हासिल की.

अनिमेष प्रधान: मां का सपना, पिता का अधूरा लक्ष्य और AIR 2 का सफर

अनिमेष प्रधान ने एनआईटी (NIT) राउरकेला से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करने के बाद इंडियन ऑयल (IOCL) में बतौर अधिकारी नौकरी शुरू की. कई लोग कहते हैं कि यूपीएससी के लिए नौकरी छोड़ना जरूरी है, लेकिन अनिमेष ने इसे गलत साबित किया. वे सुबह 6 बजे उठकर 3-4 घंटे पढ़ाई करते, फिर दिनभर ऑफिस की जिम्मेदारी निभाते और शाम को थके-हारे घर लौटने के बाद किताबों में खो जाते. उन्होंने ऑफिस के पास ही घर लिया, जिससे आने-जाने का समय बचे और उसे वे पढ़ाई में लगा सकें.

कैंसर से जंग और यूपीएससी की तैयारी

अनिमेष प्रधान की असल परीक्षा तब शुरू हुई, जब उनकी मां को कैंसर का पता चला. वे अपनी मां के साथ हर वीडियो कॉल का स्क्रीनशॉट लेते थे, क्योंकि उन्हें डर था कि शायद यह आखिरी बात हो. वे कहते हैं, कैंसर बहुत अनप्रिडिक्टेबल होता है. आपको नहीं पता कल क्या होगा. यूपीएससी इंटरव्यू के दौरान जब उनकी मां की तबीयत बहुत खराब थी, तब भी उन्होंने खुद को संभाला. अनिमेष ने बताया कि वे मां से अक्सर कहते थे, जब तक मैं डीएम (DM) के बंगले में शिफ्ट नहीं हो जाता, आपको कुछ नहीं होगा.

पिता की यादें और ‘पूरी-छोले’ का इनाम

अनिमेष ने अपने पिता को 11वीं कक्षा में ही खो दिया था. उन्हें याद है कि स्कूल में जब भी वे टॉप करते थे तो उनके पिता उन्हें स्कूटर पर बिठाकर एक खास दुकान पर ‘पूरी-छोले’ खिलाने ले जाते थे. यही छोटी-छोटी यादें उनके संघर्ष की सबसे बड़ी ताकत बनीं. जब 12वीं का रिजल्ट आया और उन्होंने फिर से टॉप किया, तब पिता साथ नहीं थे. अब जब वे देश के दूसरे सबसे बड़े टॉपर बने हैं, तब भी उनके माता-पिता यह खुशी देखने के लिए मौजूद नहीं हैं. लेकिन अनिमेष को विश्वास है कि उनका आशीर्वाद हमेशा साथ है.

सफलता का मंत्र: हार न मानने वाला जज्बा

यूपीएससी सीएसई 2023 में दूसरी रैंक हासिल करने वाले अनिमेष प्रधान का मानना है कि यूपीएससी एक अकेला ऐसा सफर है, जहां आपको खुद का सहारा खुद बनना पड़ता है. जब वे उदास होते थे तो डायरी लिखते थे या कमरे में अकेले डांस कर लेते थे. इस दौरान उन्होंने कुकिंग से भी माइंड रिलैक्स किया. उन्होंने कभी भी खुद को सिर्फ एस्पिरेंट के तौर पर नहीं देखा, बल्कि अपनी पहचान को जीवित रखा. उनका कहना है कि अगर आपके पास मजबूत ‘क्यों’ (Why) है तो ‘कैसे’ (How) अपने आप आसान हो जाता है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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