देश दुनिया

बगावत से इनाम तक : पूर्व CJI रंजन गोगोई की राज्यसभा पारी खामोशी में खत्म!

भारत के चीफ जस्टिस रह चुके रंजन गोगोई राज्यसभा सांसद के तौर पर अपनी छह साल की रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन, नितांत निष्क्रिय पारी समाप्त करके आज राज्यसभा से रिटायर हो गये।

रंजन गोगोई को सबसे ज़्यादा सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में उस बग़ावती लम्हे के भागीदार के रूप में याद किया जाता है जब 2018 में देश की सबसे बड़ी अदालत के चार जजों- जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सर्वोच्च न्यायालय के कामकाज और तौर-तरीकों पर खुलेआम अपनी नाखुशी, नाराज़गी ज़ाहिर की थी और जस्टिस दीपक मिश्रा पर जजों को मनमाने तरीके से मुकदमे आवंटित करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि लोकतंत्र खतरे में है।जस्टिस चेलमेश्वर के घर पर हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद देश में तहलका मच गया था और न्यायपालिका की आज़ादी के सवाल पर तमाम मंचों पर तीखी बहसें छिड़ गई थीं। रंजन गोगोई का कहना था कि भारत की न्याय पालिका को सुधारों की नहीं, क्रांति की ज़रूरत है।

लेकिन चतुर, चालाक रंजन गोगोई ने बाद में इस ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के तेवरों से बिल्कुल उलट रवैया अपनाया और दीपक मिश्रा के बाद चीफ जस्टिस बने। रंजन गोगोई अयोध्या विवाद और राफेल विमान सौदे में सुप्रीम कोर्ट के ऐसे फैसलों में शामिल रहे जिन्होंने मोदी सरकार की राजनीति को आगे बढ़ाने में मदद की। इसके ईनाम के तौर पर उन्हें 2020 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यसभा सांसद मनोनीत किया। उनके मनोननयन पर काफी विवाद भी हुआ था।

गोगोई मनोनीत सांसद बनने वाले पहले चीफ जस्टिस हैं हालांकि उनसे पहले चीफ जस्टिस रंगनाथ मिश्रा और चीफ जस्टिस बहरुल इस्लाम भी राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं।

उत्तर पूर्व से पहले चीफ जस्टिस बनने वाले रंजन गोगोई पर यौन शोषण के आरोप भी लगे थे। दिलचस्प बात यह है कि इस मामले की सुनवाई के लिए गठित सुप्रीम कोर्ट बेंच में रंजन गोगोई भी शामिल थे। इस पर भी काफी विवाद हुआ था। बाद में सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच समिति ने रंजन गोगोई को क्लीन चिट दे दी थी।

गोगोई ने अपनी राज्यसभा सांसदी की शुरुआत में कहा था कि वह न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच पुल बनाने की नीयत और इरादे के साथ आये हैं। मगर छह साल की उनकी पारी में उनकी खामोशी इस बात की गवाह है कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया।

रंजन गोगोई पर यह शेर बिल्कुल फिट बैठता है

Manoj Mishra

Editor in Chief

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button