शहर में केदारपुर लैंडफिल साइट पर लगे कचरे के पहाड़ों को खत्म करने के लिए नगर निगम 1200 टन (टीपीडी) क्षमता का फ्रेश सॉलेट वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट लगाने जा रहा है। लैंडफिल साइट पर अत्याधुनिक मशीन को लगाने और संचालन की जिम्मेदारी नई दिल्ली की एपेक्स अर्बन रिसोर्स मैनेजमेंट कंपनी को दी है। ये कंपनी इटली की एक कंपनी से भागीदारी कर 1200 टन (टीपीडी) की मशीन इटली से मंगाकर लगाएगी। 10 साल तक कंपनी संधारण और संचालन का खुद काम करेगी। बिजली का कनेक्शन नगर निगम कराकर देगा, फिर बिजली का बिल इस कंपनी को ही चुकता करना होगा।
अभी नगर निगम की लैंडफिल साइट पर सिर्फ 100 टन टीपीडी क्षमता का प्लांट है। मूसीबत यह है कि यह प्लांट अधिकांश समय बंद ही रहता है। इसके कारण ही लैंडफिल साइट पर कचरे के पहाड़ दिनों-दिन बढ़ते जा रहे हैं। इससे निजात दिलाने के लिए निगम ने इस काम को स्वीकृति दी है। निगम ने इस कंपनी को लेटर ऑफ ऑथराइजेशन (एलओए) जारी कर दिया है। 15 दिन के अंदर कंपनी को नगर निगम से अनुबंध करना है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले इस कंपनी ने इटली से आए एक्सपर्ट के साथ लैंडफिल साइट का निरीक्षण कर काम करने की इच्छा जाहिर की थी।
अभी लैंडफिल साइट पर 11 लाख टन कचरा मौजूद
निगम ने दयाचरण कंपनी को 6.03 लाख टन कचरा निपटान की जिम्मेदारी दी। कंपनी उक्त काम को पूरा नहीं कर पाई है। निगम के जिम्मेदारों का कहना है कि मौके पर 11 लाख टन कचरा मौजूद है। इसके साथ ही रोज औसतन 550 टन कचरा लैंडफिल साइट पर पहुंच रहा है। शहर के अंदर इसके अलावा 150-200 टन कचरा पड़ा ही रह जाता है। शेष कचरे को ग्वालियर नगर निगम के अलावा आसपास के नगर पालिका और परिषदों से एकत्रित करने की भी योजना है।
4.5 करोड़ खर्च होंगे… 10 साल संचालन करेगी कंपनी
निगम इस पूरे प्रोजेक्ट में 4.5 करोड़ रुपए खर्च करेगा। 10 साल तक संचालन और संधारण के दौरान कंपनी कचरे की प्रोसेसिंग कर आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) तैयार करेगी। उसे कंपनी बाजार में बेच सकेगी। इससे निगम को कोई लेना-देना नहीं होगा।
साल 2007 में लगा पहला कचरा निष्पादन प्लांट
शहर के कचरे के निष्पादन के लिए 19 साल पहले साल 2007 में पहला कचरा निष्पादन प्लांट लगाया था। ये प्लांट एकेसी डेवलपमेंट ने लगाया था। यह प्रदेश का पहला प्लांट था। देखरेख के अभाव में प्लांट ठीक से नहीं चला। साल 2017 में निगम ने ईको ग्रीन कंपनी को जिम्मेदारी दी। वह प्लांट पर पहुंचने वाले कचरे से बिजली तक नहीं बना सकी। कचरे का निष्पादन करना भी बंद कर दिया था। अब तीसरी बाद प्लांट को जिंदा करने की प्लानिंग की गई है।
15 दिन में करना है अनुबंध, 120 दिन में डिजाइन
- एलओए लेटर के बाद 15 दिन में नगर निगम से अनुबंध करना होगा।
- फिर 120 दिन में कंपनी को डिजाइन एंड बिल्ड पर काम करना होगा।
- 120 दिन के बाद प्रोसेसिंग प्लांट पर तीन महीने ट्रायल रन होगा।
- ट्रायल रन की सफलता के बाद 10 साल तक संचालन एवं संधारण का काम कंपनी करेगी।
हां, एलओए लेटर दिया है, कंपनी जल्द अनुबंध करेगी
लैंडफिल साइट पर कचरे की प्रोसेसिंग का काम करने 4.5 करोड़ का टेंडर हो गया है। जिस कंपनी को काम दिया है, वह इटली की कंपनी से मिलकर अपनी मशीन लगाएगी। उसके बाद कचरे की प्रोसेसिंग कर आरडीएफ तैयार करेगी। हमने कंपनी को एलओए लेटर दे दिया है। एक सप्ताह में अनुबंध कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। – टी प्रतीक राव, अपर आयुक्त नगर निगम, ग्वालियर





