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आंगन में किचन गार्डन, उसमें मूली, पालक, धनिया, मिर्च… 10 फसलें; इस गांव के लोग बाजार से नहीं लाते सब्जी

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के समीप कैम्बो गांव के कुछ लोग ऐसे है, जिन्होंने घर के छोटे से आंगन या बागान में ही ऐसा किचन गार्डन तैयार कर लिया है. जिससे उन्हें बाजार से महंगी सब्जी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है. घर पर ही खुद से ताजा सब्जी खाते हैं और और इसके स्वाद का आनंद  लेते हैं.

ग्रामीण मनोज बताते हैं कि हमें बाजार से सब्जी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है. फिलहाल उन्होंने 10 तरह की सब्जियां लगाई है.सीजन के हिसाब से सब्जी बदलते हैं. अभी हमारे पास मूली, धनिया पत्ता, मेथी व पलक साग, फूलगोभी, लहसुन, अदरक, मिर्चा, टमाटर देखने को मिलेगा. क्योंकि फिलवक्त इन्हीं का सीजन है.गोबर खाद है बहुत कारगर
उन्होंने आगे बताया कि सब्जी के नाम पर हम बाजार से सिर्फ आलू लाते हैं. बाकी सब हमारे किचन गार्डन से ही निकल आता है. हम लोगों ने मटर भी लगाकर रखा है. दरअसल, हमारे पास 1.5 डिसमिल जमीन है. जमीन की प्राकृतिक रूप से उर्वरा शक्ति अच्छी है. इसके अलावा हम गोबर खाद का इस्तेमाल करते हैं और हमेशा सुखा हुआ गोबर खाद डालते हैं.उन्होंने बताया कि गोबर खाद डालते समय कई बार लोग गलती कर बैठते हैं और सोचते हैं कि हमने तो गोबर खाद डाला. फिर सब्जी की पैदावार अच्छी क्यों नहीं हो रही है. आपको कम से कम 20 दिन पुराना गोबर खाद डालना है. एकदम सूखा हुआ. यह धीरे-धीरे पौधे में फर्टाइल होना शुरू होता है. यह भी जरूरी है कि आप खरपतवार को एकदम हटाते रहें.

इसके अलावा नीम का तेल या नीम का उबला हुआ पानी पौधे में चार-पांच दिन में एक बार डाल दें. किचन का जो वेस्ट निकलता है उसको हम लोग सूखे पत्ते के साथ एक जगह इकट्ठा करते हैं, जो सूखे पत्ते बेकार हो जाते हैं उन्हें फेंकना नहीं है. उसको भी किचन वेस्ट के साथ डालते रहना है. जब खाद के रूप में बन जाए तो 15 दिन में एक बार पौधे में डाल देना है, इससे पहले नहीं डालना है.

अत्यधिक मात्रा में पानी न दें
इसके अलावा आपको बहुत अत्यधिक मात्रा में पानी भी नहीं देना है. यही एक बड़ी गलती लोग किचन गार्डन में कर देते हैं. भर भर कर पानी डाल देते हैं. पानी इतना दें कि जड़ गीला हो जाए बस और शाम में एकदम थोड़ा सा जितना सुबह डाले है, उसका आधा शाम में डालना है. बस आप इतना ही कर लीजिए. फिर देखिए थोड़ी सी जमीन में ही कैसे आप 10 तरह की फसल उगा पाएंगे.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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