छत्तीसगढ़

कवर्धा शिक्षा विभाग में कथित 2 अरब 18 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार, दो बाबू निलंबित, अधिकारियों पर भी हो सकती है कार्रवाई

कवर्धा: जिले के शिक्षा विभाग में सामने आए कथित दो अरब 18 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता के मामले ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए विभाग ने दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है, जबकि जांच के दायरे में अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों के आने के भी संकेत मिल रहे हैं.

शिक्षा विभाग के वर्ग 2 के कर्मचारी निलंबित

विभागीय आदेश के अनुसार, तत्कालीन कार्यालय में पदस्थ वर्ग–2 कर्मचारी माया कसार और योगेंद्र कश्यप को निलंबन आदेश जारी किया गया है. दोनों कर्मचारियों पर शिक्षा विभाग से जुड़े वित्तीय लेन–देन, भुगतान प्रक्रिया और लेखा अभिलेखों में अनियमितता से संबंधित भूमिका होने का संदेह है. निलंबन की कार्रवाई जांच प्रभावित न हो, इस उद्देश्य से की गई कार्रवाई बताया जा रहा है.

बताया जा रहा है कि यह प्रकरण शिक्षा विभाग में विभिन्न मदों में किए गए भुगतान और उनके समुचित लेखा-जोखा से जुड़ा हुआ है. प्रारंभिक जांच में दस्तावेजों के मिलान के दौरान बड़ी राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं. इसी के आधार पर विभागीय स्तर पर विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं.

वरिष्ठ अधिकारियों पर भी हो सकती है कार्रवाई

सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और जांच आगे बढ़ने पर अन्य कर्मचारियों के साथ-साथ कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है. हालांकि अब तक किसी वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन उच्च अधिकारियों को कारवाई के लिए पत्र लिखा गया है इससे विभागीय हलकों में हलचल तेज है.

बताया जा रहा है कि यह प्रकरण शिक्षा विभाग में विभिन्न मदों में किए गए भुगतान और उनके समुचित लेखा-जोखा से जुड़ा हुआ है. प्रारंभिक जांच में दस्तावेजों के मिलान के दौरान बड़ी राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं. इसी के आधार पर विभागीय स्तर पर विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं.

वरिष्ठ अधिकारियों पर भी हो सकती है कार्रवाई

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सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और जांच आगे बढ़ने पर अन्य कर्मचारियों के साथ-साथ कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है. हालांकि अब तक किसी वरिष्ठ अधिकारी के

 

Screenshot 20260202 075456 खिलाफ औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन उच्च अधिकारियों को कारवाई के लिए पत्र लिखा गया है इससे विभागीय हलकों में हलचल तेज है.इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं. जिलेभर में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि इतनी बड़ी कथित अनियमितता आखिर कैसे लंबे समय तक नजर अंदाज होती रही. फिलहाल सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे मामले में जिम्मेदारी किन-किन स्तरों पर तय की जाती है और आगे किस तरह की कार्रवाई होती है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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