उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड के साथ-साथ मौसम की गतिविधियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। स्काईमेट वेदर की रिपोर्ट के अनुसार, एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो गया है, जिसके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और गिलगित-बाल्टिस्तान के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में अच्छी बर्फबारी शुरू हो चुकी है। 30 और 31 दिसंबर को इसकी तीव्रता बढ़ने की संभावना है, जिससे पहाड़ों पर बर्फ की सफेद चादर और घनी होगी। हालांकि, शिमला, कुल्लू और मसूरी जैसे पर्यटन स्थलों पर फिलहाल लाइव स्नोफॉल के लिए जनवरी के दूसरे सप्ताह तक इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि वहां केवल बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी के ही आसार हैं।
मैदानी इलाकों की बात करें तो दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में घने कोहरे (Dense Fog) का प्रकोप जारी रहेगा। कोहरे और हल्की हवाओं के कारण दिल्ली में प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच सकता है। पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में 31 दिसंबर और 1 जनवरी को हल्की बौछारें पड़ने की भी संभावना है। कोहरे के कारण सड़क, रेल और हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है, इसलिए यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
उत्तर प्रदेश और बिहार में भी धूप न निकलने के कारण ‘कोल्ड डे’ जैसी स्थिति बनी हुई है। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और पटना सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के जिलों में अगले तीन-चार दिनों तक घना कोहरा छाया रहेगा, जिससे दिन के तापमान में गिरावट आएगी और ठंड का अहसास बढ़ेगा। दूसरी ओर, दक्षिण भारत में तमिलनाडु के तटीय इलाकों और केरल में हल्की बारिश की गतिविधियां शुरू होने की उम्मीद है, जिससे चेन्नई जैसे शहरों में बढ़ते प्रदूषण से कुछ राहत मिल सकती है।नए साल के स्वागत के दौरान पूरे उत्तर और मध्य भारत में कड़ाके की सर्दी बरकरार रहेगी। 6 जनवरी के आसपास राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की एक नई संभावना बनती दिख रही है, जिसके बारे में मौसम विभाग लगातार नजर बनाए हुए है। फिलहाल, पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी और मैदानों में घने कोहरे को देखते हुए अपनी यात्रा की योजना सावधानी से बनाने की जरूरत है।





