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संतुलन, सीमित मसाले और मिट्टी की हांडी! क्यों खास है बिहार का चंपारण मटन, जानें घर पर बनाने की विधि

दिल्लीः बिहार के चंपारण का नाम आते ही अगर किसी डिश की सबसे पहले चर्चा होती है, तो वह है चंपारण मटन. यह सिर्फ एक नॉनवेज डिश नहीं, बल्कि यहां की मिट्टी, पानी और संस्कृति का स्वाद है. अपने अनोखे पकाने के तरीके और सीमित मसालों की वजह से चंपारण मटन देशभर में पसंद किया जाता है.

घर पर ऐसे बनाएं चंपारण मटन
अगर आप चंपारण मटन घर पर बनाना चाहते हैं, तो इसकी प्रक्रिया बिल्कुल अलग है. इसमें ज्यादा मसाले नहीं, बल्कि सही मात्रा और धैर्य सबसे जरूरी है. 1 किलो मटन के लिए करीब 800 ग्राम प्याज, 50 ग्राम लहसुन और 30 ग्राम अदरक लिया जाता है. मसालों में जीरा 2 ग्राम, काली मिर्च 1.5 ग्राम, लाल मिर्च पाउडर 2 ग्राम, धनिया पाउडर 1 ग्राम, हल्दी और नमक स्वाद अनुसार डाला जाता है. गरम मसाले में 2 छोटी इलायची, 1 बड़ी इलायची, 4-5 लौंग, थोड़ी सी दालचीनी और थोड़ा सा काला इलायची शामिल होता है. खास बात यह है कि गरम मसाला मटन पक जाने के बाद, चूल्हा बंद करते समय डाला जाता है, ताकि खुशबू बरकरार रहे.

मिट्टी की हांडी में पकता असली स्वाद
चंपारण मटन की असली पहचान है, इसका पकाने का तरीका. इसे प्रेशर कुकर में नहीं, बल्कि मिट्टी की हांडी में पकाया जाता है. पहले प्याज और सारे मसालों को तेल में अच्छे से मिलाया जाता है. फिर हांडी में तेल गरम कर मटन डाला जाता है. हांडी का मुंह कपड़े से बांधकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. इसमें अलग से पानी नहीं डाला जाता, बल्कि प्याज और मटन के अपने रस में ही मांस गलता है. तेज आंच पर पकाने से मटन का स्वाद खराब हो सकता है, इसलिए समय देना बहुत जरूरी है.गणेश प्रसाद के मुताबिक, चंपारण का पानी और वहां की परवरिश मटन के स्वाद को खास बनाती है. यहां का मांस हल्का होता है और ज्यादा वजन वाला नहीं होता. आमतौर पर 6-7 किलो का मटन ज्यादा नहीं लिया जाता, क्योंकि ज्यादा वजन का मटन स्वाद बिगाड़ देता है. यही संतुलन, सीमित मसाले और मिट्टी की हांडी में धीमी आंच पर पकाने की परंपरा चंपारण मटन को खास बनाती है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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