अगर आपको सुनाई कम देता है, कान भारी या बंद-सा महसूस होता है, अंदर खुजली होती रहती है और कभी-कभी घंटी बजने या सीटी जैसी आवाज आती है, कई बार हल्का दर्द या खुजली होती है, तो इसका मतलब है कि आपके कान में ईयरवैक्स यानी पीला मैल जमा हो गया है। कई लोग कान के मैल को गंदगी समझते हैं लेकिन वास्तव में यह थोड़ी मात्रा में कान के लिए जरूरी है क्योंकि यह कान की सुरक्षा करता हैदरअसल कान के अंदर बनने वाला मैल सेरुमेन, सीबम, डेड स्किन, पसीना, बाल और धूल आदि का मिश्रण होता है। कई बार यह कान की नली को बैक्टीरिया, फंगस, धूल और इंफेक्शन से बचाता है। हालांकि इसकी मात्रा बढ़ना और खासकर सूखा मैल कान के लिए खतरनाक हो सकता है।
ENT डॉक्टर अब्राहम2 ( .) के अनुसार, कान में ज्यादा सूखा मैल बनने से आपको कान के ब्लॉक होने, सुनाई कम देना, कान भारी लगना, खुजली, घंटी बजने जैसी आवाज, दर्द आदि समस्याएं हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लोग कान कान मैल निकालने के लिए कुछ भी तरीके आजामा लेते हैं जोकि गलत है। डॉक्टर ने कान का मैल निकालने के सुरक्षित उपाय बताए हैं।कुछ लोगों में नेचुरली मैल ज्यादा बनता है। किसी की कान की नली पतली या बालों वाली होती है। उम्र बढ़ने पर भी मैल सूखकर जमा हो सकता है। बार-बार पानी कान में जाने से मैल फूलकर ब्लॉकेज कर सकता है। साथ ही, कान में उंगली, पिन या ईयरबड डालने से मैल और अंदर धकेला जाता है और जमकर कड़ा हो जाता है।लेकिन डॉक्टर ने बताया कि यह सबसे खतरनाक गलती है। इससे मैल और अंदर चला जाता है, धीरे-धीरे बहुत सख्त होकर ब्लॉकेज बना देता है और ईयरड्रम फटने का भी खतरा होता है। इसलिए कान में किसी भी चीज को डालने से बचना चाहिए।डॉक्टर के अनुसार ऑलिव ऑयल कान के मैल को नरम करने का सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। यह मैल को ढीला करके धीरे-धीरे खुद बाहर गिरा देता है। इसके लिए दवा की दुकान से ऑलिव ऑयल ड्रॉपर लें और प्रभावित कान में दिन में दो बार 2-3 बूंदें डालें। इसे लगभग दो हफ्ते नियमित रूप से इस्तेमाल करें। कुछ दिनों बाद मैल नरम होकर बाहर आने लगेगा।डॉक्टर ने बताया कि फार्मेसी में और भी कई ड्रॉप्स मिलते हैं जैसे सोडियम बाइकार्बोनेट ड्रॉप्स या हाइड्रोजन पेरऑक्साइड और डॉक्यूसेट सोडियम ड्रॉप्स। ये असरदार हैं लेकिन कभी-कभी कान में जलन या इरिटेशन कर सकते हैं। इसलिए इन्हें लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।डॉक्टर ने बताया कि कान का मैल निकालने के लिए कभी ईयर कैंडल या वैक्यूम क्लीनर से बचें। वैज्ञानिक रूप से इनके काम करने का कोई प्रमाण नहीं है और ये जलने, चोट या नुकसान का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा कान में कभी सरसों का गर्म तेल न डालें।
डॉक्टर ने बताया कि वैसे तो कान का मैल खुद बाहर निकल जाता है लेकिन अगर आपके कानों में ज्यादा बन रहा है और इसकी वजह से आपको पांच दिन बाद भी आराम नहीं मिल रहा, कान पूरी तरह बंद हैं, सुनाई बहुत कम दे रहा है, दर्द या चक्कर आ रहा है, तो तुरंत ईएनटी एक्सपर्ट के पास जाएं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें। जगन्नाथ डॉट कॉम इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है।





