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खुद तो आगे बढ़ीं, दूसरी महिलाओं को भी दिया रोजगार, संगीता की एक पहल ने कई घरों में जलाया चूल्हा

गोरखपुर: जिले की महिलाएं अब न सिर्फ घर बैठे छोटे-मोटे काम करके अच्छी कमाई कर पा रही हैं, बल्कि शहर में ‘होम-बेस्ड बिजनेस’ का एक नया चलन भी तेजी से बढ़ रहा है. गोरखपुर की महिला उद्यमी संगीता पांडे इस बदलाव में सबसे बड़ी भूमिका निभा रही हैं, जो रोजाना दर्जनों महिलाओं को काम से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं.

  उन्होंने इस बार महिलाओं के लिए एक खास रोजगार योजना शुरू की है. इसके लिए वह गुजरात के सूरत गईं, जहां से उन्होंने बड़ी मात्रा में साड़ियों और अन्य कपड़ों में इस्तेमाल होने वाला अलस्टेयर कपड़ा खरीदा. वापस आकर उन्होंने शहर की कई महिलाओं को यह कपड़ा दिया, जिन्हें घर बैठे ही महिलाएं 25-25 मीटर के हिसाब से काटती हैं और पैक करती हैं, फिर महिलाएं इसे थोक और खुदरा बाजार में भेजती हैं. इस काम से जुड़ी महिलाओं को 25 से 30 प्रतिशत का मुनाफा मिल रहा है.संगीता बताती हैं कि शहर में कई महिलाएं पहले से ही अलग-अलग घरेलू उत्पाद बनाकर भेज रही हैं. इसमें सबसे लोकप्रिय काम है रुई से बाती (कॉटन विक) बनाना, जिसमें महिलाओं को 40 से 50 प्रतिशत तक का मार्जिन मिलता है. इसके अलावा कई महिलाएं घर पर ही झाड़ू तैयार कर बाजार में सप्लाई कर रही हैं, जिससे उन्हें स्थायी कमाई हो रही है.

कम लागत में बेहतर मुनाफा

संगीता पांडे कहती हैं कि अगर गोरखपुर की महिलाएं थोड़ी मेहनत और थोड़ा समय देकर ऐसे काम से जुड़ती हैं तो उन्हें घर बैठे बेहतर कमाई का मौका मिल सकता है और वे आत्मनिर्भर बन सकती हैं. उनके मुताबिक, शहर में अभी भी महिलाओं के लिए कई ऐसे पारंपरिक और नए बिजनेस मॉडल मौजूद हैं, जिन्हें अपनाकर वह कम लागत में बेहतर मुनाफा कमा सकती हैं.गोरखपुर में यह बढ़ता हुआ ‘होम-बेस्ड बिजनेस मॉडल’ न सिर्फ महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बना रहा है, बल्कि शहर में ‘महिला उद्यमिता’ के नए रास्ते भी खोल रहा है. संगीता पांडे जैसी महिलाएं इस बदलाव का नेतृत्व कर रही हैं और आने वाले समय में यह पहल ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को रोजगार से जोड़ सकती है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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