बस्तर अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विविधता के साथ-साथ अपने पारंपरिक व्यंजनों के लिए भी जाना जाता है. इन्हीं में से एक है अनमोला भाजी, जिसे यहां के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद पसंद किया जाता है. खेतों में अपने आप उगने वाली यह भाजी न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद मानी जाती है. बस्तर में इसे विशेष रूप से पेज के साथ खाने की परंपरा है, जबकि इसकी सब्जी रोजाना भोजन का स्वाद बढ़ाती है.स्थानीय लोगों के अनुसार, अनमोला भाजी में खट्टापन स्वाभाविक रूप से मौजूद होता है. इसके कारण इसमें टमाटर या इमली मिलाने की आवश्यकता नहीं होती. बस्तर में जहां चेच भाजी को इमली के साथ पकाया जाता है, वहीं अनमोला भाजी को बिना अतिरिक्त खट्टे पदार्थ के ही बनाया जाता है. यही वजह है कि इसका स्वाद बिल्कुल अलग होता है. यह भाजी कई प्रकार के विटामिन से भरपूर होती है. इसे औषधीय गुणों के लिए भी उपयोग में लाया जाता है.कैसे बनती है अनमोला भाजी?
इस पारंपरिक रेसिपी को बनाना बेहद आसान है. सबसे पहले कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म किया जाता है और इसमें बारीक कटा प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनते हैं. उसके बाद कटी हुई अनमोला भाजी डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. हल्दी, मिर्च और नमक मिलाने के बाद इसे कुछ मिनट तक पकने दिया जाता है. चाहें तो टमाटर भी डाला जा सकते हैं. हालांकि, बस्तर के लोग इसे बिना टमाटर के ही पसंद करते हैं. लगभग पांच मिनट में यह स्वादिष्ट सब्जी तैयार हो जाती है, जिसे चावल या रोटी के साथ परोसा जा सकता है.बस्तर के बाजारों में आसानी से उपलब्ध यह भाजी अब लोगों के बीच अपनी पौष्टिकता और अनोखे स्वाद के कारण लोकप्रिय हो रही है. यदि आप भी किसी पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक सब्ज़ी की तलाश में हैं, तो अनमोला भाजी आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है.
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