अगर इरादे मजबूत हों, तो राह की कोई भी बाधा आपको अपनी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। इस बात को पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है राजस्थान के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले होनहार आईएएस (IAS) अधिकारी गंगा सिंह राजपुरोहित ने। गंगा सिंह राजपुरोहित ने हाल ही में गुजरात के नर्मदा जिले के जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट (DM) के रूप में पदभार ग्रहण किया है। इस नई जिम्मेदारी को संभालते ही उन्होंने एक अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है—वे वर्तमान में पूरे गुजरात राज्य के सबसे युवा जिला कलेक्टर बन गए हैं।
भारत-पाकिस्तान सीमा के पास छोटे से गांव में हुआ जन्म
आईएएस गंगा सिंह राजपुरोहित का जन्म 5 मई 1994 को राजस्थान के नवगठित जिले बालोतरा की सिणधरी तहसील के डंडाली गांव में हुआ था। भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक स्थित इस छोटे से गांव की आबादी महज 2000 के आसपास है। जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर बसे एक ऐसे सुदूर इलाके से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा पास करना अपने आप में एक मिसाल है। उनकी शुरुआती स्कूली शिक्षा गांव के ही एक सरकारी स्कूल में हुई, जहां वे हमेशा से पढ़ाई में काफी होनहार थे और उन्होंने दसवीं कक्षा में 76 फीसदी अंकों के साथ स्कूल टॉप किया था।
बीएससी के बाद दादाजी की प्रेरणा से चुना ‘हिंदी माध्यम’
गंगा सिंह ने अपनी आगे की पढ़ाई जालोर से पूरी की और कॉलेज में साइंस (B.Sc.) से स्नातक की डिग्री हासिल की। आमतौर पर साइंस के छात्र सिविल सेवा परीक्षा के लिए अंग्रेजी माध्यम का चुनाव करते हैं, लेकिन गंगा सिंह ने अपने दादाजी की प्रेरणा से एक अलग राह चुनी। उन्होंने न सिर्फ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के लिए हिंदी माध्यम को अपनाया, बल्कि मुख्य परीक्षा में अपना वैकल्पिक विषय भी ‘हिंदी साहित्य’ ही रखा।
अपनी कड़ी मेहनत और सटीक रणनीति के बल पर उन्होंने साल 2016 में अपने दूसरे ही प्रयास में इतिहास रच दिया। उन्होंने पूरे देश में ऑल इंडिया 33वीं रैंक (AIR 33) हासिल की और महज 23 साल की बेहद कम उम्र में 2017 बैच के आईएएस अधिकारी बन गए।
पहली बार मिली जिला कलेक्टर के रूप में पोस्टिंग
नर्मदा जिले के डीएम के रूप में गंगा सिंह राजपुरोहित की जिला कलेक्टर के तौर पर यह पहली पोस्टिंग है। इससे पहले वे वडोदरा नगर निगम में डिप्टी कमिश्नर के पद पर अपनी कुशल सेवाएं दे रहे थे। वर्तमान में गुजरात कैडर में उनके 2017 बैच के कुल 9 आईएएस अधिकारी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें से 7 अधिकारी अलग-अलग जिलों में बतौर कलेक्टर तैनात हैं, लेकिन इन सबमें सबसे कम उम्र गंगा सिंह की ही है।उनकी यह असाधारण सफलता देश भर के उन लाखों छात्रों और यूपीएससी उम्मीदवारों के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है, जो हिंदी माध्यम से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। गंगा सिंह ने साबित कर दिया कि भाषा कभी भी आपकी प्रतिभा और कामयाबी के आड़े नहीं आ सकती।





