मंडला: असम के काजीरंगा टाइगर रिजर्व से 4 और जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया है. शनिवार को यहां सुपखार परिक्षेत्र में विशेष रूप से निर्मित बाड़े में सभी को छोड़ा गया है. कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसों की संख्या अब बढ़कर 8 तक पहुंच गई है. यहां अगामी 3 सालों में 50 भैंसों को लाकर छोड़े जाने की योजना है.
जंगली भैंसों को फिर से बसाने की कोशिश
करीब 150 साल पहले मध्य प्रदेश के जंगलों से विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों को फिर से बसाने की दिशा में यह बड़ी पहल मानी जा रही है. प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा से वन विभाग ने विशेष योजना तैयार कर असम के काजीरंगा टाइगर रिजर्व से जंगली भैंसों को लाकर कान्हा के सुपखार क्षेत्र में पुनर्स्थापित करने का अभियान शुरू किया है. वन विभाग ने दूसरे चरण में शनिवार को 4 अन्य भैंसों को छोड़ा है.
कुनबा बढ़ाने का लक्ष्य
कान्हा टाइगर रिजर्व में पहले चरण में 4 जंगली भैंसों को बसाया गया था. जबकि दूसरे चरण में चार और भैंसों को लाया गया. अब कान्हा में जंगली भैंसों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है, जिसमें 2 नर और 6 मादा शामिल हैं. वन विभाग ने आगामी तीन वर्षों में 50 जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन का लक्ष्य तय किया है.
सीएम मोहन ने छोड़े थे 4 जंगली भैंसे
कान्हा नेशनल पार्क के सहायक संचालक आशीष पांडे ने बताया, “मध्य प्रदेश वन विभाग द्वारा कान्हा नेशनल पार्क में जंगली भैंसों को स्थापित करने की विशेष परियोजना चलाई जा रही है. ये लगभग 150 वर्ष पूर्व हमारे मध्य प्रदेश की धरती से विलुप्त हो चुके थे, प्रथम चरण में 28 अप्रैल को मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा यहां 4 भैंसों को छोड़ा गया था.”





