प्रयागराज। यमुनापार में कोरांव विकास खंड के बेलहट में गायब हुई 472 बीघा वन भूमि की खोज ठंडे बस्ते में है। करीब एक वर्ष से अफसर इसे लेकर चिट्टी बाजी रहे हैं। कभी वन विभाग तहसील प्रशासन को पत्र लिखता है तो कभी जिला प्रशासन को। यह सरकारी चिट्ठियां दौड़ तो खूब रहीं हैं, लेकिन असर नहीं दिख रहा। जिम्मेदार सिर्फ कागजी कोरम को पूरा कर रहे हैं। करोड़ों की इस जमीन को सरकारी खाते में लाने के लिए ठोस कदम कोई उठा ही नहीं रहा है।
मई 2025 में इस जमीन की खोजबीन शुरू हुई थी
बेलहट गांव में वन विभाग की करीब 2044 बीघा जमीन है। चकबंदी के पहले यह पूरी जमीन वन भूमि के नाम थी। चकबंदी के बाद सिर्फ 1572 बीघा ही जमीन बची। 472 बीघे जमीन कहां गई, इसका पता ही नहीं चला। मई 2025 में इस जमीन की खोजबीन शुरू हुई थी। अब तक यह जमीन वन विभाग के मालिकाना हक में नहीं आई है।
बेशकीमती जमीन की खोजबीन में दिलचस्पी नहीं
सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों पर कार्रवाई के दावे करने वाला प्रशासन करोड़ों रुपये कीमत की इस जमीन को तलाशने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। एक वर्ष में दर्जन भर पत्र वन विभाग, कोरांव तहसील प्रशासन और जिला प्रशासन के बीच आए और गए। सरकारी दफ्तरों में यह चिट्ठियां लेकर सिर्फ डंप की जा रहीं हैं। बेशकीमती जमीन की खोजबीन में जिम्मेदार कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
डीएम का आदेश ठंडे बस्ते में
12 फरवरी को डीएम ने खुद तहसील प्रशासन को संबंधित भूमि वन विभाग के नाम दर्ज कराने के आदेश दिए थे। यह आदेश भी ठंडे बस्ते में चला गया है। वन विभाग के रेंजर प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि राजस्व विभाग को सारे दस्तावेज और प्रमाण उपलब्ध कररा दिए गए हैं। फिर भी वन भूमि विभाग के नाम दर्ज नहीं की जा रही है।





