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एलकेजी से IAS तक फ्री किताबें सिर्फ 100 रुपये में, अंबिकापुर की दादी बना रहीं बच्चों का भविष्य

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला प्रेमलता गोयल पिछले 20 सालों से स्कूली बच्चों कि सेवा कर रही है. बुजुर्ग महिला अपने बुक डिपो पर एलकेजी से लेकर आईएस तैयारी तक के पुराने बुक रखी, जिन्हें फ्री में देती है. लेकिन बुक को ले जाने वाले सुरक्षित रखे इसके लिए प्रेमलता मात्र 100 रूपये लेती. ऐसे में अंबिकापुर सहित आसपास के इलाके सहित छत्तीसगढ़ के अन्य बड़े शहरों में सुरुचि बुक बैंक कि किताबें जा चुकी हैं और खासकर प्रेमलता गोयल अपने आप को गौरवान्वित महसूस तब करती है, जब कोई परिजन मुस्कुराता है और कहता है, अब हमें बुक लेने में सहूलियत हो रही है. नहीं तो शहरों में बड़े-बड़े बुक बैंक है, जहां आपको बुक तो मिल जाएंगे, लेकिन बजट की परेशानी होगी. ऐसे में अंबिकापुर कि बुजुर्ग महिला मिडल क्लास लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. देखिये ये रिपोर्ट..

इस पहल की शुरुआत किसी बाहरी प्रेरणा से नहीं बल्कि उनकी खुद की जरूरत से हुई. उनकी छोटी बेटी की पढ़ाई के दौरान किताबें जुटाना मुश्किल हो जाता था. कई बार पूरी सेट खरीदनी पड़ती थी, जबकि जरूरत सिर्फ एक-दो किताबों की होती थी. इसी समस्या को देखते हुए उन्होंने पुरानी किताबें इकट्ठा कर जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाने का निर्णय लिया.

एलकेजी से आईएएस तक, हर तरह की किताबें उपलब्ध
प्रेमलता के बुक बैंक में एलकेजी से लेकर आईएएस की तैयारी तक की किताबें उपलब्ध हैं. इसके अलावा इंजीनियरिंग, मेडिकल, आईआईटी, नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें भी यहां मिलती हैं. छात्र यहां आकर किताबें देखते हैं और जरूरत के हिसाब से ले जाते हैं.

कोरोना के बाद बढ़ी लोकप्रियता और भीड़
प्रेमलता गोयल ने बताया कि कोरोना काल के बाद उनके इस प्रयास को और ज्यादा पहचान मिली. अब सीजन के समय इतनी भीड़ रहती है कि उन्हें चाय पीने तक का समय नहीं मिल पाता. इसके बावजूद वे पूरी लगन के साथ

कोरोना के बाद बढ़ी लोकप्रियता और भीड़
प्रेमलता गोयल ने बताया कि कोरोना काल के बाद उनके इस प्रयास को और ज्यादा पहचान मिली. अब सीजन के समय इतनी भीड़ रहती है कि उन्हें चाय पीने तक का समय नहीं मिल पाता. इसके बावजूद वे पूरी लगन के साथ इस सेवा में जुटी रहती हैं.

देशभर से लोग उठा चुके हैं लाभ
इस बुक बैंक से बिलासपुर, मनेंद्रगढ़, इंदौर, भाटापारा, सीतापुर, सरगुजा, सूरजपुर जैसे कई शहरों के लोग लाभान्वित हो चुके हैं. इतना ही नहीं, कोलकाता और दिल्ली तक के लोग यहां से किताबें लेने आ चुके हैं.

इस सेवा में जुटी रहती हैं.

देशभर से लोग उठा चुके हैं लाभ
इस बुक बैंक से बिलासपुर, मनेंद्रगढ़, इंदौर, भाटापारा, सीतापुर, सरगुजा, सूरजपुर जैसे कई शहरों के लोग लाभान्वित हो चुके हैं. इतना ही नहीं, कोलकाता और दिल्ली तक के लोग यहां से किताबें लेने आ चुके हैं.

सम्मान से ज्यादा संतुष्टि देती है सेवा
बुजुर्ग प्रेमलता को अग्रवाल समाज की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है. लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी खुशी तब होती है, जब बच्चे और उनके माता-पिता मुस्कुराते हुए किताबें लेकर जाते हैं. वे कहती हैं कि उनका उद्देश्य सिर्फ समाज सेवा करना है, न कि किसी उपलब्धि का प्रचार करना.

छात्रों के लिए बड़ी राहत, खर्च में भारी कमी
क्लास 11थ कि छात्रा प्रियांशी बताती हैं कि वह पिछले तीन साल से यहां से किताबें ले रही हैं. पहले जहां किताबें खरीदना महंगा पड़ता था, वहीं अब उन्हें मात्र 100 रुपये में किताबें मिल जाती हैं.

अभिभावकों को भी मिल रहा सहारा
अभिभावक अंजली जायसवाल ने बताया कि वे अपने बच्चे के लिए पहली कक्षा की किताबें लेने आई हैं. पहले किताबें दुकानों से महंगे दामों पर खरीदनी पड़ती थीं, लेकिन यहां बिना अतिरिक्त शुल्क के किताबें मिल जाती हैं. साथ ही पुरानी किताबें लौटाने पर नई किताबें भी दी जाती हैं.

उम्र सिर्फ एक संख्या, सेवा का जुनून कायम
62 साल की उम्र में भी प्रेमलता गोयल पूरे उत्साह के साथ इस बुक बैंक को चला रही हैं. उनका कहना है कि जब तक उनमें ताकत और हिम्मत है, वे इस सेवा कार्य को जारी रखेंगी.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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