वॉशिंगटन: जियो-पॉलिटिकल के बदलते समीकरणों के बीच एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको हैरान कर दिया है. कल तक भारत को रूसी तेल खरीदने से रोकने के लिए जिस अमेरिका ने एडी-चोटी का जोर लगा दिया था, वो आज खुद भारत से मदद की गुहार लगा रहा है. अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने अमेरिका की नई ‘ऑयल डिप्लोमेसी’ पर खुलासा करते हुए बताया है कि उन्होंने अपने ‘दोस्त’ भारत से संपर्क किया है ताकि वो समुद्र में फंसे हुए रूसी तेल को खरीद सके. उनका कहना है कि भारत के ऐसा करने से दुनिया भर में बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम काबू में आएंगे.मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई रुकने की वजह से अमेरिका पर दबाव इतना बढ़ गया है कि उसे अपनी पुरानी नीतियों को दरकिनार कर भारत की ‘ऑयल डिप्लोमेसी’ का सहारा लेना पड़ रहा है. पूछे जाने पर क्रिस राइट कहते हैं कि ये सिर्फ ‘शॉर्ट टर्म टेंपरेरी सॉल्यूशन’
अमेरिका ने क्यों बदली अपनी चाल?
पिछले साल तक ट्रंप प्रशासन भारत पर रूसी तेल न खरीदने का दबाव बना रहा था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं.
- कीमतों का दबाव: ईरान और इजरायल के बीच जंग से कच्चे तेल की कीमतें 2 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं.
- सप्लाई का संकट: होर्मुज की खाड़ी बंद होने से दुनिया भर की रिफाइनरियों को तेल नहीं मिल रहा है.
- भारत का अहम रोल: अमेरिका का मानना है कि अगर भारत समुद्र में खड़े रूसी टैंकरों से तेल खरीदकर अपनी रिफाइनरियों में ले जाता है, तो इससे ग्लोबल मार्केट में तेल की कमी दूर होगी और अन्य देशों पर से दबाव कम होगा.
क्या है 30 दिन की ‘स्पेशल छूट’?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों के लिए 30 दिनों की विशेष छूट जारी की है. इसके तहत भारत उन रूसी जहाजों से तेल खरीद सकता है जो इस वक्त समुद्र में फंसे हुए हैं. क्रिस राइट ने इसे एक ‘प्रैक्टिकल समाधान’ बताया है ताकि दुनिया भर में तेल की सप्लाई बनी रहे.





