कहते हैं हुनर की कोई उम्र नहीं होती, और बालाघाट जिले के हट्टा गांव के रहने वाले 71 साल के उमेश श्रीरंग लीला ने इसे सच कर दिखाया है. कभी साइकिल रिपेयरिंग की दुकान चलाने वाले उमेश अब नारियल के खोल से ऐसी कलाकृतियां बना रहे हैं कि लोग देखते ही रह जाते हैं. कोरोना काल में जब लॉकडाउन लगा तो उनकी साइकिल रिपेयरिंग की रोजी-रोटी बंद हो गई. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. पहले से ही आर्ट एंड क्राफ्ट में दिलचस्पी थी, बस उसी शौक को उन्होंने काम में बदल दिया.
साइकिल से नारियल तक का सफर
उमेश बताते हैं कि साल 2021 से उन्होंने नारियल के खोल से आर्ट बनाना शुरू किया. उन्हें याद था कि पुराने समय में संत नारियल के खोल में पानी पीते थे. यहीं से उनके दिमाग में ख्याल आया कि क्यों न इसे कप और कमंडल का रूप दिया जाए. धीरे-धीरे उन्होंने नारियल के खोल से कप, कमंडल, शिवलिंग और सजावटी सामान बनाना शुरू कर दिया. उनका कहना है कि जो मन में आता है, वही बना देता हूं.
मेलों में लगती है उनकी खास दुकान
उमेश अपने बनाए सामान को बेचने के लिए स्थानीय मेलों में जाते हैं. कभी लांजी तो कभी विदर्भ के प्रसिद्ध कचारगढ़ मेले में उनकी दुकान सजती है. वहां उनके प्रोडक्ट की अच्छी डिमांड रहती है. लोग खास तौर पर उनकी कला देखने और खरीदने आते
कैसे तैयार होता है सामान?
शुरुआत में उन्होंने मंदिरों से टूटे नारियल के खोल इकट्ठा किए, लेकिन वे काम के नहीं निकले. फिर उन्होंने खुद नारियल खरीदना शुरू किया. नारियल फोड़कर उसका गूदा निकालते हैं, किस बनाकर बेच देते हैं और खाली खोल पर अपनी कला दिखाते हैं. एक पीस तैयार करने में करीब एक दिन लग जाता है. बारीकी से तराशने और डिजाइन बनाने में काफी मेहनत करनी पड़ती है.
बन गए प्रेरणा
आज उमेश अपने गांव में मिसाल बन चुके हैं. लोग उनकी तारीफ करते नहीं थकते. उनके घर के बच्चे भी उनसे यह हुनर सीख रहे हैं. 71 साल की उम्र में नई शुरुआत कर उन्होंने साबित कर दिया कि अगर मन में कुछ करने का जज्बा हो, तो कोई भी उम्र छोटी नहीं होती.





