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185 साल की विरासत और देश सेवा का संकल्प: पांचवीं पीढ़ी के रूप में सेना में शामिल होंगे तुनमय शुक्ला

सेना में कई पीढ़ियों तक देश की सेवा करने का आदर्श और परंपरा बहुत कम ही परिवार निभा पाता है। लेकिन शुक्ला परिवार की सैन्य यात्रा इसका अपवाद है। उनके परिवार वर्ष 1841 में शुरू हुई थी और अब यह 185 वर्षों का सफर तय कर चुकी है। इस गौरवशाली परंपरा की पांचवीं पीढ़ी के रूप में जेंटलमैन कैडेट तुनमय शुक्ला (Tunmay Shukla) 7 मार्च को ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी गया से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन प्राप्त करेंगे। यह केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी निभाए गए कर्तव्य और समर्पण की निरंतरता है। परिवार का स्पष्ट मानना है कि राष्ट्र की सेवा उनका कर्तव्य है और समाज की सेवा उनका मिशन।

इस सैन्य यात्रा की शुरुआत हवलदार करता राम शुक्ला (Havildar Karta Ram Shukla) से हुई, जिन्होंने 1841 से 1859 तक 32 बंगाल नेटिव इन्फैंट्री ब्राह्मण बंगाल आर्मी में सेवा दी। उन्होंने 1852 के द्वितीय आंग्ल बर्मी युद्ध और 1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान अपनी जिम्मेदारियां निभाईं और 1859 में सेवानिवृत्त हुए।

दूसरी पीढ़ी में नायक हरि नारायण शुक्ला ने 1909 से 1923 तक सेना में सेवा दी। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उन्हें सुएज नहर की रक्षा के लिए तैनात किया गया और बाद में 14वीं भारतीय डिवीजन के साथ मेसोपोटामिया अभियान में भाग लिया। 1922 में तीसरी ब्राह्मण बटालियन के भंग होने के बाद उनका स्थानांतरण आर्मी सर्विस कोर बटालियन में हुआ और 1923 में वे सेवानिवृत्त हुए।

तीसरी पीढ़ी के लेफ्टिनेंट कर्नल श्री निवास शुक्ला ने 1954 से 1990 तक भारतीय सेना में सेवा दी। वे 1962 में इंडियन मिलिट्री अकादमी देहरादून से कमीशंड हुए और 35 मीडियम रेजिमेंट आर्टिलरी में नियुक्त हुए। उन्होंने 1962 के भारत चीन युद्ध, 1965 और 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध तथा 1987 में श्रीलंका में ऑपरेशन पवन में भाग लिया। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क चिकित्सा सेवा के लिए सैनिक परमार्थ चिकित्सालय ट्रस्ट की स्थापना की। 1 जून 2021 को उनका निधन हो गया।

चौथी पीढ़ी के रूप में कर्नल बिपिन कुमार शुक्ला वर्तमान में भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं। अब पांचवीं पीढ़ी के तुनमय शुक्ला, जिन्होंने कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में विशिष्ट योग्यता के साथ स्नातक किया है, ने उच्च वेतन वाली कॉर्पोरेट नौकरियों के बजाय सेना में जाने का निर्णय लिया। 7 मार्च को वे पासिंग आउट परेड के दौरान शपथ लेकर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में शामिल होंगे और अपने परिवार की लंबे समय से चली आ रही सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाएंगे।अरुणाचल प्रदेश में सेना की अदालत ने एक हवलदार को अग्निवीर पर यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी कर दिया है। अग्निवीर के साथ 18 सिख लाइट इन्फैंट्री (SIKH LI) में सेवारत हवलदार पर 46 इन्फैंट्री ब्रिगेड के आदेशानुसार जिला कोर्ट मार्शल (DCM) द्वारा मुकदमा चलाया गया। हवलदार पर एक अग्निवीर का यौन शोषण करने का आरोप था।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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