छत्तीसगढ़

धान खरीदी व्यवस्था से किसानों में बढ़ा उत्साह, सरल प्रक्रिया से मिल रहा सीधा लाभ

*धान खरीदी व्यवस्था से किसानों में बढ़ा उत्साह, सरल प्रक्रिया से मिल रहा सीधा लाभ*

*पिता के निधन के बाद खेती की जिम्मेदारी संभालते फिरतू पात्रे को मिला सरकार का संबल*

कवर्धा  दिसंबर 2025। कबीरधाम जिले में धान खरीदी से किसानों में उत्साह देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की पहल से पहले की तुलना में बेहतर और सुगम खरीदी व्यवस्था के कारण किसान बिना किसी परेशानी के अपना धान बेच पा रहे हैं। पंजीयन से लेकर तौल और भुगतान तक की प्रक्रिया सरल होने से किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। यही व्यवस्था ग्राम खैरवार के किसान श्री फिरतू पात्रे के लिए सहारा बन गया है। पिता के स्वर्गवास के बाद श्री फिरतू पात्रे ने स्वयं खेती की जिम्मेदारी संभाली। उनके पास कुल 5.50 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें वे धान के साथ-साथ कुछ क्षेत्र में गन्ने की खेती भी करते हैं। इस वर्ष उन्होंने अपनी खेती से कुल 84.80 क्विंटल धान का विक्रय किया है।
श्री फिरतू पात्रे बताते हैं कि उनके पिता का निधन लगभग एक माह पूर्व हुआ था। अंतिम संस्कार और दशगात्र जैसे पारिवारिक संस्कारों में काफी खर्च आया, जिसके लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ा। भावुक होते हुए वे बताते हैं कि पिता के साथ ही वे वर्षों से खेती का कार्य करते थे और उनकी स्मृतियाँ हमेशा उनके साथ रहेंगी। उन्होंने अपने पिता का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और परंपरा के साथ किया। वे आगे कहते हैं कि पिता द्वारा दी गई जमीन और शासन द्वारा धान का 3100 रुपये प्रति क्विंटल का उचित मूल्य आज उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बना है। धान विक्रय से प्राप्त राशि से अब उन्हें किसी प्रकार की आर्थिक चिंता नहीं है और लिया गया कर्ज भी चुकाया जा रहा है।
श्री फिरतू पात्रे का पंजीयन धान खरीदी केंद्र ग्राम कोको में है, जहाँ बिना किसी परेशानी के उनका पूरा 84.80 क्विंटल धान खरीदा गया। खरीदी केंद्र में पेयजल, छाया, बैठने की व्यवस्था सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित की गई हैं, जिससे किसानों को सहज वातावरण में अपनी फसल बेचने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार किसानों के हित में निरंतर बेहतर कार्य कर रही है। खरीदी व्यवस्था से लेकर भुगतान प्रणाली तक में बड़ा सुधार हुआ है। धान विक्रय के बाद राशि शीघ्रता से सीधे बैंक खाते में पहुँच जाती है, जिससे किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिल रही है।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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