*सेवा की कहानी जिससे ग्रामीण महिला बनी आत्मनिर्भर*
*विभागीय योजनाओं के अभिसरण से ग्रामीण महिला बनी उद्यमी*
*बिहान योजना से जुड़कर मिला लखपति दीदी का दर्जा*
कवर्धा अक्टूबर 2026। जरूरतमंदों के जीवन में शासकीय योजनाओं से सकारात्मक बदलाव लाते हुए आत्मनिर्भर बनाने की यह सेवा संकल्प अभियान की अनोखी कहानी सभी के लिए बहुत प्रेरणादायक है। कहानी है कबीरधाम जिले के जनपद पंचायत स.लोहारा के ग्राम पंचायत राम्हेपुर के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान अंतर्गत जय मां शारदा स्व सहायता समूह की दीदी श्रीमती रानी यादव की। इनके साथ समूह में कुल 10 महिलाएं हैं जिनमें से लखपति दीदी श्रीमती रानी यादव गांव में पहले मजदूरी का कार्य करती थी। पहले आय का उचित साधन नहीं था जिसकी वजह से परिवार चलाना मुश्किल था साथ ही कमाई का साधन न होने के कारण अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता था। बच्चों की पढ़ाई लिखाई, घर की जरूरत पूरा करने में परेशानी और बच्चों के भविष्य के चिंता लगी रहती थी। एक दिन रानी यादव को बिहान योजना के बारे में जानकारी हुई। बिहान योजना से होने वाले फायदों के बारे में पता चला जिसमे शासकीय योजनाओं द्वारा आजीविका की विभिन्न गतिविधि से जुड़कर स्वयं वित्तीय सहयोग प्राप्त कर सकते हैं। फिर वे जय मां शारदा स्व सहायता समूह से जुड़ी और अपने गांव में ही व्यवसाय करने का निर्णय लिया। गांव और बाजार में मुर्गे की मांग और इससे जुड़ा व्यवसाय के बारे में बताया गया। रीना यादव ने मुर्गी पालन व्यवसाय से जुड़ने का फैसला किया और व्यवसाय करने के लिए रानी यादव को सामुदायिक निवेश कोष में 60 हजार रुपए और बैंक लोन के रूप में 1 लाख रुपए की वित्तीय सहायता मिली। योजना से सहयोग मिलने पर मुर्गी खरीदने का रास्ता साफ हो गया।
इसी बीच हितग्राही की मांग पर विभागीय अभिसरण के द्वारा विकसित भारत जी राम जी योजना द्वारा सर्व सुविधा युक्त मुर्गी पालन शेड का निर्माण किया गया। लखपति दीदी रानी यादव कहती है कि समूह से जुड़ने के बाद पैसे की तंगी खत्म हो गई, घर की जरूरत भी आसानी से पूरी हो रही है और अपने भविष्य के लिए बचत करने लगी हूं। श्रीमती रीना यादव कहती है कि आजीविका कार्य के लिए बैंक लिंकेज द्वारा ऋण लेकर अपने आजीविका गतिविधि के रूप में मुर्गी पालन का कार्य शुरू की। समूह एवं ग्राम संगठन के बैठकों में मुर्गी पालन की जानकारी दी गई। मुर्गी पालन का व्यवसाय अच्छा लगा और इसे अपना आजीविका चलाने का माध्यम बन ली। मुर्गी पालन में सफलता प्राप्त होने से अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है जिससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। अभी तक लगभग 1 लाख 80 हजार रुपए से अधिक की आमदनी हो चुकी है। इस व्यवसाय में मेरे परिवार का बहुत सहयोग मिल रहा है।समूह में जुड़ने से हौसला बढ़ा है और आजीविका की इस गतिविधि से लगभग 15 से 18 हजार रुपए प्रति माह आय अर्जित कर रही हूं।





