नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने उन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में छूटे हुए पात्र मतदाताओं और नए मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आयोग ने कहा है कि कोई भी पात्र नागरिक केवल एसआईआर के दौरान सूची में नाम शामिल नहीं होने के कारण मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए। आयोग के निर्देश राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद दिए गए। चुनाव आयोग ने दोहराया कि मतदाता पंजीकरण एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। ऐसे में एसआईआर पूरा होने के बाद भी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में जोड़े जा सकते हैं।
चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में करोड़ों लोगों के वोटर लिस्ट से नाम कटने के आरोप लगे। इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने एक विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत 20 राज्यों में जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं, उनसे संपर्क किया जाएगा। चुनाव आयोग ने राज्य के चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे उन इलाकों में ‘छूटे हुए’ और नए वोटरों को तुरंत शामिल करने के लिए एक स्पेशल ड्राइव शुरू करें, जहां वोटर लिस्ट में सुधार का काम पूरा हो चुका है। चुनाव आयोग की इस स्पेशल ड्राइव का मकसद उन योग्य वोटरों को फिर से शामिल करना है जिन्हें गहन सुधार के दौरान छोड़ दिया गया था या हटा दिया गया था। इसके साथ ही पहली बार वोट देने वाले और युवा वोटरों का रजिस्ट्रेशन करना भी है।
चुनाव आयोग ने इस विशेष अभियान को लेकर एक आधिकारिक सूचना जारी की। आयोग की तरफ से ये निर्देश राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के साथ हुई एक वर्चुअल मीटिंग के बाद दिए गए। चुनाव आयोग ने बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) को निर्देश दिया कि वे मौजूदा वोटर लिस्ट का SIR से पहले की लिस्ट से मिलान करें ताकि उन वोटरों की पहचान की जा सके जिनके नाम पहले लिस्ट में थे लेकिन फाइनल लिस्ट से हटा दिए गए थे।
बीएलओ पहचाने गए सभी छूटे हुए लोगों के लिए घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करेंगे। हर अधिकारी को हर हफ्ते 20 से 25 वोटरों को कवर करने का टारगेट दिया गया है, ताकि एक महीने के अंदर वेरिफिकेशन ड्राइव पूरी की जा सके। बीएलओ नए योग्य युवा वोटरों और असल में छूटे हुए वोटरों से मौके पर ही फॉर्म 6 एप्लीकेशन लेंगे। इसके बाद पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लिस्ट सीधे मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) के साथ शेयर की जाएगी। स्पेशल ड्राइव आयोजित करने का फैसला SIR के फैसलों को लेकर चुनाव आयोग के अंदर मतभेदों की खबरों के बीच भी आया है। हालांकि, EC ने कहा कि उसने SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए थे।
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