नई दिल्ली। फिल्म बागबान का गाना होली खेले रघुवीरा आपने जरूर सुना होगा। ये सुपरहिट गाना आज भी होली के मौके पर जरूर बजाया जाता है और लोग इस पर जमकर नाचते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं ये गाना असल में अवध के एक गीत से प्रेरित है और इसे गाया भी अवधी में ही गया है?जी हां, अवध और भोजपुरी क्षेत्रों में होली के अवसर पर एक लोकगीत गाया जाता है होरी खेले रघुवीरा अवध मा…। ये गीत फगुआ कहलाता है, जिसे जाता है। मालिनी अवस्थी की आवाज में इस गीत का मजा दोगुना हो जाता है। आइए जानते हैं क्या कहता है ये गीत और क्यों ये गीत इतना खास है।
क्या कहता है ये गीत?
ये गीत सवाल-जवाब की शैली में गाया जाता है और क्योंकि ये अवध क्षेत्र का गीत है, इसमें राम जी का जिक्र भी होता है। गीत में पूछा जाता है कि अवध नगरी में किसके हाथ सोने की पिचकारी है और किसके हाथ अबीर है? इसके जवाब में गाया जाता है कि राम जी के हाथ पिचकारी है और माता सिता के हाथों अबीर है और रघुवीर यानी श्री राम अवध में होली का आनंद ले रहे हैं। इस गीत में आगे पूछा जाता है कि किसके हाथों में ढोलक और मंजीरा हैं? इसके जवाब में कहते हैं कि राम जी के हाथों में ढोलक शोभा दे रहा है और उनके छोटे भाई लक्ष्मण मंजीरा बजाकर होली का आनंद ले रहे हैं। इसी तरह इस गीत में ऐसे ही सवाल जवाब किए गए हैं, जो अवध में राम जी की होली को बयां करते हैं।
गीत के अंत में गाते हैं कि पूरी अवधपुरी होली खुश है और चारों ओर अबीर-गुलाल उड़ रहे हैं। अवध का पूरा माहौल होली और भक्ति के रंग में रंग गया है, क्योंकि यहां रघुवीर माता सीता, लक्ष्मण और हुनमान जी के साथ होली खेल रहे हैं।
अवधी गीत की खासियत
ये गीत होली के दौरान गाए जाने वाले लोकगीत फाग का हिस्सा है। इसके बोल मजेदार हैं और गीत एक खास लय में गाया गया है। इसकी धुन इतनी मजेदार है कि सुनकर हर किसी का झूमने का मन कर जाता है। इस गीत में भक्ति रस भी बयां होता है। अवध क्षेत्र के लोगों को भगवान राम बेहद प्रिय हैं। गीतों के जरिए लोग भगवान राम को अपने त्योहार का हिस्सा बनाते हैं और साथ मिलकर नाचते-गाते हैं।





