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स्वच्छता परिसर बना आजीविका का केंद्र, तारणी बाई कमा रहीं 6 हजार रूपए प्रतिमाह

रायपुर स्वच्छता न केवल स्वस्थ जीवन का आधार है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता का एक सशक्त माध्यम भी सिद्ध हो रही है। छत्तीसगढ़ राज्य के मुंगेली जिले के विकासखंड मुंगेली के ग्राम पंचायत छतौना के आश्रित ग्राम बुचुआकापा की निवासी तारणी बाई ने इसे चरितार्थ कर दिखाया है। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत गांव में निर्मित दुकानयुक्त सामुदायिक स्वच्छता परिसर को ही अपनी आजीविका का मुख्य साधन बना लिया है।

’गांव में ही मिला आजीविका का साधन’

तारणी बाई इस स्वच्छता परिसर में किराना, जनरल स्टोर और सिलाई सेंटर का सफल संचालन कर रही हैं। पहले रोजगार के लिए गांव से बाहर जाने में उन्हें काफी असहजता होती थी, लेकिन अब गांव में ही रोजगार मिलने से वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।

’प्रतिमाह 5 से 6 हजार रूपए की आय’

इस केंद्र के जरिए वे हर महीने लगभग 5 से 6 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इससे उन्हें परिवार के भरण-पोषण में आर्थिक सहयोग देने और खुद को स्वावलंबी बनाने का अवसर मिला है।

’रखरखाव की दोहरी जिम्मेदारी’

रोजगार चलाने के साथ-साथ तारणी बाई इस सामुदायिक स्वच्छता परिसर के नियमित संचालन और साफ-सफाई व रखरखाव की जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से निभा रही हैं।

ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा

सामुदायिक स्वच्छता परिसर के रूप में विकसित यह केंद्र अब स्वच्छता के साथ-साथ सवबंस रोजगार सृजन की मिसाल बन चुका है। स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग कर आत्मनिर्भर बनने की तारणी बाई की यह पहल क्षेत्र की अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।

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Manoj Mishra

Editor in Chief

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